1 साल बाद भी नहीं मिला चूहे से कुतरने वाले मामले में पीड़ित परिजनों को इंसाफ, यूनिक हॉस्पिटल अब तक कोई कार्रवाई नहीं

87 वर्षीय बुजुर्ग की मौत के बाद शव को अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के चलते चूहों ने बुरी तरह से कतर डाला था और एक साल बीत जाने के बाद भी अभी तक हॉस्पिटल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

इंदौर, आकाश धोलपुरे। 21 सितंबर 2020 को इंदौर (Indore) के अन्नपूर्णा रोड स्थित यूनिक हॉस्पिटल (Unique Hospital) में एक दर्दनाक मंजर सामने आया था। दरअसल, अस्पताल में कोरोना (corona) का इलाज करा रहे 87 वर्षीय बुजुर्ग की मौत के बाद शव को अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के चलते चूहों ने बुरी तरह से कतर डाला था। इस घटना के एक साल गुजर जाने के बाद भी अब तक कोई माकूल कार्रवाई न होने से मृतक के परिजन नाराज है और वो पूरे मामले अस्पताल प्रबंधन और संचालक डॉ. प्रमोद नीमा को ही आज भी जिम्मेदार मानते है।

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घटना एक साल पहले की है जब कोरोना की रडार पर रह चुके इंदौर में इतवारिया बाजार में रहने वाले बुजुर्ग नवीनचंद जैन को 17 सितंबर 2020 को इंदौर के यूनिक हॉस्पिटल में कोरोना के इलाज के लिए भर्ती कराया गया था और 20 सितंबर की रात को उन्होंने दम तोड़ दिया था। जिसके बाद 21 सितंबर को उनके शव को जब परिजन देखने पहुंचे तो बुजुर्ग का शव चूहों ने बुरी तरह से कुतर डाला था। शव की आंखों से लेकर हाथ और पैर बुरी तरह से कुतर दिए गए थे। जिसके बाद आक्रोशित परिजनों ने जमकर हंगामा मचा दिया था। इसके बाद जैसे तैसे परिवार को मनाकर बुजुर्ग का अंतिम संस्कार कराया गया। वहीं बुजुर्ग के परिजनों ने पूरे मामले को अस्पताल प्रबंधन और संचालक डॉ.प्रमोद नीमा की लापरवाही बताकर कार्रवाई की मांग की थी।

हालांकि, इसके बाद उस समय परिजन एडीएम अजय देव शर्मा से मिले थे और पूरे मामले की शिकायत की थी। वहीं सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत की गई। शव को कुतरे जाने के मामले में कांग्रेस ने मामला विधानसभा में भी उठाया था बावजूद इसके नतीजा सिफर रहा। मामला कोर्ट में भी गया था लेकिन कोर्ट में इसी तरह के मामलों को लेकर लगी पीआईएल पर बहस भी चली।

इधर, अब इस मामले में मृतक के बेटे प्रकाश जैन ने बताया कि एडीएम के पास हमारे बयान हुए थे इसके बाद उन्होंने मामला डीएम तक पहुंचाने की बात कही थी लेकिन अब तक कलेक्टर की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी हमे प्राप्त हुई है कि प्रशासन ने अब तक क्या कार्रवाई की है। सीएम हेल्पलाइन से लेकर मानव अधिकार आयोग तक शिकायत की गई लेकिन कही से भी कोई जबाव नहीं आया। उन्होंने इस पूरे मामले में प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें व उनके परिवार का न्याय चाहिए ताकि यूनिक हॉस्पिटल किसी अन्य मरीज के साथ ऐसा न कर सके। उन्होंने बताया कि पूरे मामले में अस्पताल पर कार्रवाई होनी थी लेकिन अस्पताल प्रबन्धन ने चालाकी दिखाते हुए पूरे मामले में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी का दोष बताकर उसे निकाल दिया जबकि खुद की गलती यूनिक अस्पताल नही स्वीकार कर रहा है।

वहीं दादाजी की याद में आज रुआंसे पोते विवेक जैन ने बताया कि उनकी व उनके परिवार की सच्चाई की लड़ाई यूनिक हॉस्पिटल से जारी रहेगी और जल्द ही वे न्यायालय की शरण मे जाएंगे। बता दें कि आज भी 87 वर्षीय नवीनचंद जैन को खोने का गम पूरे परिवार को सताता है और जब जब भी वो उन्हें याद करते है तो यूनिक अस्पताल का क्रूरतम चेहरा उनके सामने से नही हटता है। फिलहाल, इस मामले में अब भी कई सवाल है जिसे लेकर अस्पताल प्रबंधन ने आज तक कोई सफाई दुनिया के सामने नही दी है जिससे ये साफ हो रहा है कि कहीं न कहीं परिजनों द्वारा अस्पताल पर लगाये जा रहे आरोपो में बहुत हद तक सच्चाई है। वही प्रशासन के रवैये को लेकर भो इस पूरे मामले में सवाल उठ रहे है।

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