अस्पताल में ठीक हो रहे मरीजों की मौत! वीडियो वायरल, कमलनाथ ने सरकार को घेरा

इंदौर| आकाश धोलपुरे| इंदौर में निजी अस्पतालों की मनमानी अब स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन को खुली चुनौती दे रही है। दरअसल, कोविड – 19 का डर दिखाकर लोगो को बेवजह अस्पताल में रोकने का आरोप निजी अस्पतालों पर लग रहा है। ऐसे में सवाल प्रशासनिक व्यवस्था और जिला कलेक्टर मनीष सिंह पर उठ रहे है। दरअसल, लोगो को उम्मीद थी कि कलेक्टर के रहते सब कुछ दुरुस्त हो जाएगा लेकिन निजी अस्पताल कोविड – 19 के बिल बढ़ाने में लगे हुए है और अब पुलिस ने तो एक शिकायत के बाद शहर के गोकुलदास अस्पताल को नोटिस भी भेज दिया है।

इसी अस्पताल से एक ताजा वीडियो में एडमिट होकर जान गंवाने वालो के परिजनों ने गोकुलदास अस्पताल प्रबंधन वसूली को लेकर सवाल उठाये है। वीडियो में जिला कलेक्टर मनीष सिंह से बिलखते परिजनों ने आस लगाई है कि वो उनकी बातें सुने और ऐसे अस्पतालों पर कड़ी कार्रवाई करे। आंखों में दर्द लिए परिजनों का आरोप है कि जो लोग आधे घण्टे पहले तक बिल्कुल स्वस्थ थे उन्हें अस्पताल प्रबंधन ने मौत के घाट उतार दिया है। आधे घण्टे के भीतर हुई मौतों के मामले में गोकुलदास प्रबंधन पर वीडियो के जरिये उठे सवालो और गोकुलदास अस्पताल की लापरवाही मामले में सांसद शंकर लालवानी ने कलेक्टर मनीष सिंह से बात की और गुरुवार रात को एसडीएम, CMHO, एम.वाय. अधीक्षक गोकुलदास अस्पताल पहुंचे और उन्होंने मामले की जांच शुरू कर दी। इधर, इसके पहले ही एक महिला ने अस्पताल की बिल बढ़ाने को लेकर कई परते एक वीडियो के जरिये पहले ही खोल दी है। जिसके बाद मामला पुलिस तक जा पहुंचा है। ऐसी शिकायते ना सिर्फ गोकुलदास अस्पताल की सामने आ रही है बल्कि अन्य कई बड़े निजी अस्पतालों में भी कोविड के नाम गोरखधंधा चल रहा है। जिस पर प्रशासन का ध्यान नही है। आज ही शहर के शैल्बी अस्पताल में में 15 दिन तक भर्ती मरीज के इलाज के बाद 3 लाख 22 हजार का बिल परिजनों को थमाया गया है और अस्पताल प्रबंधन कह रहा है कि बिल तो 10 लाख तक भी हो रहे है। इलाज तो प्रकिया के तहत ही होता है।

महिला की शिकायत पर गोकुलदास अस्पताल को पुलिस का नोटिस

इंदौर के ढक्कन वाला कुआं स्थित गोकुलदास अस्पताल की कारगुजारियों का खुलासा महू में रहने वाली नम्रता पांडे नामक महिला ने कर दिया जिसके बाद पुलिस ने शिकायत पर गोकुलदास अस्पताल को नोटिस भेजा है। दरअसल, महू में रहने वाली नम्रता पांडे के ससुर की तबीयत खराब हुई थी और महिला के देवर के मिलट्री में होने के चलते उन्हें पहले मिलट्री हॉस्पिटल महू ले जाया गया जहां से उन्हें एक निजी अस्पताल में भेज दिया गया। कोविड कि आशंका के चलते 24 अप्रैल को महिला के ससुर को गोकुलदास अस्पताल में एडमिट किया गया जहां उनका इलाज 2 से 3 दिन तक ठीक चला। नम्रता का आरोप है कि उनके ससुर स्वस्थ होने लगे जिसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने कोविड रिपोर्ट न आने का बहाना बनाया और डिस्चार्ज नही किया। 30 अप्रैल तक भी अस्पताल कोविड रिपोर्ट नही दे पाया आखिरकार महिला ने खुद ही तफ्तीश करने की ठानी और इंदौर पुलिस के मदद के जरिये कोविड रिपोर्ट निकलवाई। इसके बाद हकीकत की परतें उतरने लगी और बिल बढ़ाने के लिए छुपाई गई कारगुजारियां सामने आने लगी। वीडियो जारी कर नम्रता पांडे ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन से जब भी पूछा गया तब हर बार अस्पताल ने सैम्पल हैदराबाद भेजे जाने की बात कही। शक होने पर जब नम्रता ने खुद रिपोर्ट निकलवाई तो ऐसा खुलासा हुआ कि सब चौंक जाए। दरअसल, महिला के ससुर की रिपोर्ट तो 26 अप्रैल को ही आ गई थी और वो कोरोना निगेटिव पाए गए थे लेकिन अस्पताल ने 2 मई तक उन्हें भर्ती रखा ताकि बिल बढ़ाया जा सके। अस्पताल को जब लगने लगा कि अब मामला हाथ से निकल गया है तो 2 मई को ही रिपोर्ट परिजनों को सौंप दी गई और 76, 600 रुपए का बिल थमाकर कहा गया कि अब आप कार्रवाई के लिए स्वतंत्र है लेकिन बिल तो आपको चुकाना पड़ेगा। इसके बाद महिला ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी किया और तुकोगंज पुलिस को शिकायत दर्ज करवाई।

कोविड-19 सैंपल की जांच रिपोर्ट छुपाने के मामले में फरियादी की शिकायत पर तुकोगंज पुलिस ने गोकुलदास हॉस्पिटल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। पुलिस की पड़ताल में यदि फरियादी की शिकायत सही पाई गई तो अस्पताल पर कार्रवाई होना तय है।

कमलनाथ ने सरकार को घेरा
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मामले को लेकर ट्वीट किया है| उन्होंने लिखा ‘इंदौर के गोकुलदास अस्पताल की यह दशा स्वास्थ्य सेवाओं पर बड़ा सवाल और शिवराज सरकार की नीयत पर गंभीर प्रश्न चिन्ह है। सरकार को इन सभी परिजनों के सवालों का जवाब और स्पष्टीकरण देते हुये इस पूरे मामले पर उच्चस्तरीय जाँच कराना चाहिये। मप्र में हालात बेक़ाबू होते जा रहे हैं।

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