Indore News: डॉक्टर दंपत्ति हुए ठगी का शिकार, 48 घंटे तक ऑनलाइन बंधक बनाकर ठगों ने लूटे लाखों रुपए

डॉक्टर दंपति के पास एक फर्जी कस्टम विभाग से कॉल आता है और डॉक्टर दंपति को मुंबई बुलाया जाता है, जिसमें ठग ने ऑनलाइन के माध्यम से बयान दर्ज करने को कहा और स्काइप से 48 घंटे तक डॉक्टर दंपत्ति से पूछताछ करते रहे।

Shashank Baranwal
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Indore News: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले इंदौर शहर में लोगों के साथ लगातार ठगी की वारदातें होती नजर आ रही हैं, जिसमें पढ़े लिखे एमबीबीएस डॉक्टर भी अब ठगी का शिकार हो रहे हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जिसमें एमबीबीएस डॉक्टर के साथ लाखों रुपए की ठगी की घटना हो गई। इस पूरे मामले में डॉक्टर दंपत्ति ने इंदौर क्राइम ब्रांच से शिकायत की है।

ये है पूरा मामला

इंदौर क्राइम ब्रांच एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया के मुताबिक डॉक्टर दंपत्ति के पास एक कोरियर कंपनी से कॉल आया था। उनके कोरियर में एमडीएमए ड्रग थाईलैंड में पकड़ा है, जिसके लिए उनको अब मुंबई कस्टम विभाग से संपर्क करना होगा। इसके तुरंत बाद डॉक्टर दंपति के पास एक फर्जी कस्टम विभाग से कॉल आता है और डॉक्टर दंपति को मुंबई बुलाया जाता है, जिसमें ठग ने ऑनलाइन के माध्यम से बयान दर्ज करने को कहा और स्काइप से 48 घंटे तक डॉक्टर दंपत्ति से पूछताछ करते रहे और अलग-अलग अकाउंट में 8 लाख रुपए ट्रांसफर करवा लिए। इसके साथ ही डॉक्टर दंपत्ति को 15 बच्चों के अपहरण के मामले में जमकर डराया। इस दौरान डॉक्टर दंपत्ति के डॉक्यूमेंट दिखाए जिनमें बच्चों के अंग ट्रांसप्लांट हो चुके हैं। जब डॉक्टर दंपत्ति के पास पैसा खत्म हो गया तो ठगों ने अपशब्द कहने के बाद फोन काट दिया। अब इस पूरे मामले में इंदौर क्राइम ब्रांच बारीक से जांच करने में जुटी हुई है। लेकिन ऑनलाइन डाटा मांगने में लगभग 6 महीने का वक्त क्राइम ब्रांच को भी लगेगा। इसके बाद आरोपियों की जानकारी मिल सकेगी। हालांकि पुलिस ठगों को जल्द पकड़ने का दावा करती नजर आ रही है।

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पत्रकारिता उन चुनिंदा पेशों में से है जो समाज को सार्थक रूप देने में सक्षम है। पत्रकार जितना ज्यादा अपने काम के प्रति ईमानदार होगा पत्रकारिता उतनी ही ज्यादा प्रखर और प्रभावकारी होगी। पत्रकारिता एक ऐसा क्षेत्र है जिसके जरिये हम मज़लूमों, शोषितों या वो लोग जो हाशिये पर है उनकी आवाज आसानी से उठा सकते हैं। पत्रकार समाज मे उतनी ही अहम भूमिका निभाता है जितना एक साहित्यकार, समाज विचारक। ये तीनों ही पुराने पूर्वाग्रह को तोड़ते हैं और अवचेतन समाज में चेतना जागृत करने का काम करते हैं। मशहूर शायर अकबर इलाहाबादी ने अपने इस शेर में बहुत सही तरीके से पत्रकारिता की भूमिका की बात कही है– खींचो न कमानों को न तलवार निकालो जब तोप मुक़ाबिल हो तो अख़बार निकालो मैं भी एक कलम का सिपाही हूँ और पत्रकारिता से जुड़ा हुआ हूँ। मुझे साहित्य में भी रुचि है । मैं एक समतामूलक समाज बनाने के लिये तत्पर हूँ।