हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी- ‘मनोरंजन के लिए शारीरिक संबंध नहीं बनाती भारतीय लड़कियां’

माननीय न्यायाधीश सुबोध अभ्यंकर ने जमानत याचिका को रद्द करते हुए साफ लिखा कि "भारत एक रूढ़िवादी देश है। अभी यहां स्थिति ऐसी नहीं कि एक अविवाहित लड़की अन्य धर्म के लड़के के साथ सिर्फ मनोरंजन के लिए शारीरिक संबंध बनाए।

इंदौर हाईकोर्ट

इन्दौर, डेस्क रिपोर्ट। नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में हाईकोर्ट (Indore Highcourt) ने अहम टिप्पणी की है। न्यायाधीश ने आदेश में लिखा है कि भारत (India) में अभी ऐसी स्थिति नहीं है कि लड़कियां मनोरंजन के लिए शारीरिक संबंध बनाए। वे सिर्फ शादी के वादे ही पर ही ऐसा करती हैं।इंदौर हाईकोर्ट में माननीय न्यायाधीश सुबोध अभ्यंकर ने एक अहम निर्णय सुनाया है।

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दरअसल उज्जैन (Ujjain) से जुड़े एक केस में आरोपी अभिषेक चौहान ने जमानत याचिका लगाई थी। इस मामले में पीड़िता अन्य धर्म की थी और 2018 से दोनों के बीच शारीरिक संबंध थे। पीड़िता का आरोप है कि अभिषेक ने उससे यह संबंध भविष्य में शादी का वादा करके बनाए थे लेकिन कुछ समय बाद उसने शादी से इंकार कर दिया जिसके चलते लड़की ने आत्महत्या का प्रयास किया। पिता की शिकायत पर पुलिस ने दुष्कर्म सहित पास्को एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया था। आरोपी ने इस मामले में जमानत याचिका दायर की थी।

लेकिन माननीय न्यायाधीश सुबोध अभ्यंकर ने जमानत याचिका को रद्द करते हुए साफ लिखा कि “भारत एक रूढ़िवादी देश है। अभी यहां स्थिति ऐसी नहीं कि एक अविवाहित लड़की अन्य धर्म के लड़के के साथ सिर्फ मनोरंजन के लिए शारीरिक संबंध बनाए। वह तभी ऐसा करती है जब उससे भविष्य में शादी का वादा किया गया हो या इसका आश्वासन हो।

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इस केस में लड़की के शादी से इन्कार करने के बाद लड़की ने आत्महत्या (suicide) की कोशिश की है। इससे साबित होता है कि वह रिश्ते के प्रति गंभीर थी। इसलिए सिर्फ आरोपी की ओर से दिए गए इस तर्क पर जमानत नहीं दी जा सकती कि उसने सहमति से संबंध बनाए थे। आरोपी का यह तर्क भी गलत है कि लड़की संबंध बनाने के समय बालिग थी।” इसी के साथ माननीय न्यायालय ने आरोपी की जमानत याचिका रद्द कर दी।