Indore News : मंदसौर गोलीकांड मामले में कोर्ट ने शासन को जारी किया नोटिस, 4 हफ्ते में मांगा जवाब

Indore High Court Bar Association

Indore Court News : मंदसौर गोलीकांड की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग करते हुए प्रस्तुत जनहित याचिका इंदौर हाईकोर्ट बेंच ने सुनवाई के लिए स्वीकार कर ली है। कोर्ट ने शासन को नोटिस जारी कर पूछा है कि जैन आयोग की रिपोर्ट अभी तक पटल पर क्यों नहीं रखी गई। शासन को 4 हफ्ते में जवाब पेश करना है।

शासन को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में मांगा जवाब

आपको बता दें कि हाई कोर्ट में यह जनहित याचिका सामाजिक कार्यकर्ता एवम पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने ने एडवोकेट प्रत्युष मिश्रा के माध्यम से दायर की है। इसमें कहा है कि वर्ष 2017 में हुए गोलीकांड को लेकर गठित जांच आयोग की रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की गई। इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने पर ही गोलीकांड की जिम्मेदारी तय होना है। वहीं पूर्व में 14 फरवरी 2023 को शासन की ओर से इस याचिका पर प्रारंभिक आपत्ति उठाते हुए यह तर्क रखे थे कि यह चलन योग्य नहीं है। जांच आयोग अधिनियम की धारा 3 (4) के तहत शासन को विधानसभा के समक्ष जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने हेतु आदेशित नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने इस तर्क को निरस्त करते हुए शासन को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है।

यह है पूरा मामला

गौरतलब है कि 6 जून 2017 को किसान आंदोलन के दौरान मंदसौर में पुलिस और किसानों के बीच मुठभेड हो गई थी। पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए गोली चलाई थी। इसमें पांच किसानों की मृत्यु हो गई थी। मामले की जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति जेके जैन की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जांच आयोग गठित किया गया था। आयोग ने अपनी अंतिम रिपोर्ट 13 जून 2018 को शासन को सौंप दी थी, लेकिन यह रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं हुई है। जांच आयोग अधिनियम, 1952 की धारा 3 के अनुसार जांच आयोग की रिपोर्ट तथा इस रिपोर्ट की अनुशंसा अनुसार की गई कार्रवाई छह माह के भीतर विधानसभा में प्रस्तुत करना थी लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया।

हाई कोर्ट में लंबित याचिका में इसी रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग की है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने पर आमजन को पता चल सकेगा कि आखिर मंदसौर गोलीकांड के पीछे कौन जिम्मेदार है।

कमलेश सारडा की रिपोर्ट


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Amit Sengar

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मुझे अपने आप पर गर्व है कि में एक पत्रकार हूँ। क्योंकि पत्रकार होना अपने आप में कलाकार, चिंतक, लेखक या जन-हित में काम करने वाले वकील जैसा होता है। पत्रकार कोई कारोबारी, व्यापारी या राजनेता नहीं होता है वह व्यापक जनता की भलाई के सरोकारों से संचालित होता है। वहीं हेनरी ल्यूस ने कहा है कि “मैं जर्नलिस्ट बना ताकि दुनिया के दिल के अधिक करीब रहूं।”

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