Indore News : दसवीं की परीक्षा में मूक-बधिर गुरदीप ने रचा इतिहास, पढ़े पूरी खबर

Amit Sengar
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Indore News : कुदरत ने अगर शारीरिक कोई कमी आप में रखी है तो उसे निराश ना हो हौसला और जज्बा अगर आपके पास है तो आप वह कर सकते हैं जो एक मूक-बधिर छात्रा जिसका नाम गुरदीप कौर वासु है।

इंदौर के वैशाली नगर की रहने वाली तीन तरह की दिव्यांगता रखने वाली छात्रा गुरदीप ने 56% अंक लाकर दसवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की है गुरदीप ना देख सकती है न सुन सकती हैं और ना बोल सकती है गुरदीप को लेकर आनंद सोसाइटी की संचालिका ने जो मेहनत की है और उसके साथ-साथ गुरदीप को परीक्षा हॉल में राइटर उपलब्ध कराने के लिए इंदौर जिला कलेक्टर इलैया राजा टी का भी योगदान तारीफ के काबिल रहा जिन्होंने एक दिव्यांग छात्र को राइटर उपलब्ध कराया। हालांकि जो राइटर गुरप्रीत को मिली वह खुद भी मुक बधिर थी। तमाम दुश्वारियां और परेशानियों के बाद गुरप्रीत ने सेंट्रल इंडिया लेवल पर बाजी मारते हुए 56% हासिल किए हो परीक्षा में पास हुई।

खुशी के मौके पर गुरप्रीत की मम्मी मनजीत कौर से बात की गई तो उन्होंने खुशी के आंसू आंखों में लिए हुए अपनी बेटी की इस कामयाबी पर बेहद खुशी जाहिर की और उसकी लगन और पढ़ने के शौक को बताते हुए इस कामयाबी का सही हकदार उसी को बताया। हालांकि गुरप्रीत की इस कामयाबी में पूरे परिवार का पूरी तरह शामिल होना भी गुरप्रीत की मम्मी ने माना।

हरप्रीत कौर जोकि गुरदीप की छोटी बहन है परीक्षा के दौरान स्पर्श से पढ़ना और उसके लिए उसी विषय की किताबों का ढूंढना एक बड़ा टास्क था क्योंकि गुरप्रीत इंग्लिश में ब्रेल लिपि पढ़ना जानती थी और हिंदी में उस किताब का ढूंढना मुश्किल हो रहा था लेकिन फिर भी कोशिश के बाद गुरप्रीत की किताब मिली और रोजाना कई घंटों की मेहनत के बाद गुरप्रीत ने परीक्षा दी और आज आए इस परीक्षा परिणाम से गुरप्रीत के साथ-साथ पूरा परिवार खुशी से झूम रहा है हरप्रीत ने यह भी कहा कि मेरी बड़ी बहन का सपना है के ऑफिस जाकर काम करें जैसे एक नार्मल व्यक्ति करता है।
इंदौर से शकील अंसारी की रिपोर्ट


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मुझे अपने आप पर गर्व है कि में एक पत्रकार हूँ। क्योंकि पत्रकार होना अपने आप में कलाकार, चिंतक, लेखक या जन-हित में काम करने वाले वकील जैसा होता है। पत्रकार कोई कारोबारी, व्यापारी या राजनेता नहीं होता है वह व्यापक जनता की भलाई के सरोकारों से संचालित होता है। वहीं हेनरी ल्यूस ने कहा है कि “मैं जर्नलिस्ट बना ताकि दुनिया के दिल के अधिक करीब रहूं।”

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