इंदौर के छात्रों ने किया कमाल, बनाया एंटी स्लीपिंग अलार्म, रुकेंगे गाड़ियों के एक्सीडेंट

Atul Saxena
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Anti Sleeping Alarm : नजर हटी दुर्घटना घटी, यह लाइन आपको हर हाईवे पर देखने को मिलेगी। कारण सिर्फ एक, ड्राइवरों को बार-बार यह याद दिलाना कि साहब गाड़ी सावधानी से चलाएं। लेकिन क्या हो जब नजर हटने की बजाय बंद हो जाए? मतलब के ड्राइवर को गाड़ी चलाते चलाते नींद आ जाए! निश्चित तौर पर इस तरह की स्थिति एक भयावह हादसे को निमंत्रण देगी।

बिना रुके बहुत लम्बी ड्राइविंग बनती है खतरा 

आमतौर पर इस तरह की स्थिति ट्रक ड्राइवरों के साथ उत्पन्न होने की संभावना सबसे ज्यादा होती है। क्योंकि कई बार ट्रक ड्राइवरों इस तरह का माल अपने ट्रक में लादकर चलते हैं कि उन्हें बिना रुके कई घंटों तक बिना सोए ट्रक चलाना पड़ता है। और ऐसी परिस्थिति में नींद आना बड़ी साधारण सी बात है, जिसके चलते एक्सीडेंट होने की संभावना 100% हो जाती है।

छात्रों का ये अविष्कार हादसे रोकने में बनेगा मददगार 

इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए इंदौर के कुछ छात्रों ने एंटी स्लीपिंग अलार्म बनाया है। इसमें इन छात्रों ने एंटी स्लीप ग्लासेस बनाए हैं, जो इस बात को डिटेक्ट करेंगे कि ड्राइवर की आंख खुली है या बंद है। अगर ग्लासेस को महसूस होता है कि ड्राइवर की आंख बंद हो गई है तो पहले तो यह मशीन बजर से बीप साउंड निकालेगी, यदि उसके बावजूद गाड़ी में ड्राइवर द्वारा हलचल नहीं होती है तो यह घूमना बंद हो जाएंगे।

स्टूडेंट्स ने इस तकनीक का किया इस्तेमाल 

इस मशीन में इन छात्रों द्वारा इंफ्रारेड सेंसर का इस्तेमाल किया गया है। आंख के अंदर का सफेद पाठ जिसे स्क्लेरा कहा जाता है जब इंफ्रारेड किरणें इस सफेद पार्ट पर जाकर टकराती हैं तब रिफ्लेक्शन कम होता है। लेकिन जब आंख बंद होगी तब इन किरणों का रिफ्लेक्शन ज्यादा होगा, और यह मशीन एक्टिव हो जाएगी और अलार्म बजाने लगेगी। इस पूरी प्रोसेस में मात्र 5 सेकंड का समय लगेगा।

गोविंदराम सेकसरिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस के छात्रों ने किया ये कमाल

गोविंदराम सेकसरिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस के छात्र अभिषेक पाटीदार ने जानकारी दी कि हम पांचों को इस डिवाइस को बनाने में तीन सप्ताह का समय लगा है । यह अभी मात्रा एक प्रोटोटाइप है, अब हम इसे बनाने के लिए मैन्युफैक्चरर से बात करेंगे और उसके बाद हम इसे मार्केट में उतारने का पूरा प्रयास करेंगे।


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पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं ....

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