कोरोना से जंग जीते आईपीएस अधिकारी ने किया प्लाज्मा डोनेट

इंदौर| आकाश धोलपुरे| देश में ICMR गाइड लाइन के तहत ब्लड प्लाज्मा थैरेपी (Plasma therapy) के जरिये इंदौर के एमजीएम कॉलेज (MGM College) में ईलाज शुरू कर दिया गया है।  एम.जी.एम. मेडिकल कॉलेज को आई.सी.एम.आर. द्वारा चुना गया है और एम.जी.एम.मेडिकल कॉलेज देश के उन 21 मेडिकल कॉलेजों में से एक है जहां प्लाज्मा थेरेपी का वैज्ञानिक पद्धति से अध्ययन एवं उपचार शुरू किया गया है।

कोरोना को हराकर लौटे आईपीएस अधिकारी आदित्य मिश्रा ने पहल करते हुए गुरूवार शाम को अपना ब्लड प्लाज्मा डोनेट किया है जिससे कोरोना संक्रमित गम्भीर मरीज की जान बचाई जा सकेगी। बता दे कि आई.पी.एस. ऑफिसर आदित्य मिश्रा बीते दिनों महू और मानपुर में ड्यूटी के दौरान कोरोना संक्रमित हुए थे और अस्पताल में भर्ती रहकर उन्होंने कोरोना से जंग लड़कर वे जीते थे | आज आई.पी.एस. अधिकारी स्वयं एम.वाय. अस्पताल पहुंचे और उन्होंने एफरेसिस मशीन के द्वारा अपना प्लाज्मा डोनेट किया। अब एम.जी.एम. की टीम प्लाज्मा का परीक्षण करने के साथ ही एंटीबॉडी लेवल का पता लगाएगी और इसके बाद ब्लड प्लाज्मा के जरिये अन्य संक्रमित मरीजों में उपचार और अध्ययन भी किया जाएगा।

बता दे कि केंद्र सरकार और आई.सी.एम.आर. ने प्लाज्मा थेरेपी पर किसी अस्पताल या संस्था के द्वारा बिना परमिशन के उपचार एवं प्रयोग पर रोक लगा रखी है और अब तक मध्यप्रदेश में सिर्फ एम.जी.एम. मेडिकल कॉलेज इंदौर और गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल को ही अधिकृत अनुमति प्राप्त हुई है। एम.जी.एम. मेडिकल कॉलेज के ट्रांसफ्यूजनक मेडिसिन विभाग के पास 3 आधुनिक एफरेसिस मशीनें है । जिनके जरिये सुरक्षित पद्धति से ब्लड ठीक हुए शख्स की जांच करने के बाद निर्धारित मापदंडों के अनुसार ब्लड प्लाज्मा एकत्रित किया जाता है।

आईपीएस की पहल की हो रही सराहना
इंदौर में आई.पी. एस. अधिकारी आदित्य मिश्रा की पहल की सरहाना की जा रही है ऐसे में अब उम्मीद की जानी चाहिए कि कोरोना संक्रमण को हराकर स्वस्थ हुए लोग प्लाज्मा डोनेट कर कोरोना संक्रमितों जान बचाने और शोध प्रक्रिया का हिस्सा बनने के लिए आगे आएंगे। हालांकि, प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने स्वास्थ्य मंत्रालय भारत सरकार से अनुमति लेकर इंदौर के अरविंदो अस्पताल में ब्लड प्लाज्मा से प्रदेश में पहली बार इलाज की शुरुआत के लिए कदम बढ़ाया था लेकिन अब आई.सी. एम. आर. की गाइड लाइन के तहत केवल चिह्नित स्वास्थ्य संस्थाओं को ही अनुमति दी गई है ऐसे में ब्लड प्लाज्मा से इलाज की शुरुआत के बाद उम्मीद की जानी चाहिए कि बड़ी संख्या में लोगो की जान थैरेपी के जरिये बचाई जा सके।