वैष्णव ट्रस्ट सेवा नहीं बल्कि भुगत रहा है डायलिसिस, समाजसेवा करने वाले ट्रस्ट का गैरजिम्मेदाराना बयान

इंदौर, आकाश धोलपुरे। मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर और विश्व के जाने माने ट्रस्ट वैष्णव शैक्षणिक और पारमार्थिक ट्रस्ट पर कोरोना की ऐसी मार पड़ी है कि अब ट्रस्टियों को स्कूली शिक्षा विभाग से समन्वय स्थापित कर पालकों से फीस वसूलने को लेकर एक खांका तैयार करना पड़ रहा है। दरअसल, हाल ही में राजमोहल्ला स्थित वैष्णव स्कूल में आधी फीस माफी के साथ ही ऑनलाइन क्लास शुरू करने की मांग को लेकर पालकों ने हंगामा खड़ा कर दिया था जिसके बाद हरकत में आये स्कूली शिक्षा विभाग ने ट्रस्ट से जुड़े गिरधर गोपाल नागर और पसारी के साथ बैठक की।

बैठक के बाद स्कूली शिक्षा विभाग ट्रस्ट की भाषा बोलते नजर आया तो ट्रस्ट की जुड़े लोगों ने साफ कर दिया कि इस साल तंगी के चलते वो 20 लाख रुपये की निशुल्क कॉपी वितरण नहीं कर पाए हैं और ट्रस्ट के द्वारा कराए जाने वाले निशुल्क इलाज को भी वो नही करवा पाए हैं। वहीं बातों ही बातों में ट्रस्ट से जुड़े गिरधर नागर ने एक ऐसी बात कह डाली जो अब पूरे ट्रस्ट पर सवाल खड़े करने के लिए काफी है। दरअसल, नागर ने साफ किया कि पालक अगले साल के 6 माह तक फीस जमा कराएं और ट्रस्ट के 4 स्कूल व 6 कालेजों का संचालन किया जा रहा है। इस दौरान नागर के बिगड़े बोल ने ये बात भी साफ कर दी है कि सालों से लोगो की ट्रस्ट के माध्यम से सेवा करने वाला भारत का नामी ट्रस्ट लोगो के डायलसिस कराने को भुगत रहा है। बस नागर के ये ही बिगड़े बोल अब ट्रस्ट की व्यवस्था और प्रबंधन पर सवाल उठा रहे है ऐसे में अब पालको को उम्मीद छोड़ देना ही बेहतर होगा क्योंकि मजबूरी मे कोई धर्मार्थ और सेवा का कार्य कर रहा हो तो उसे परमार्थ कार्य छोड़ ही देना चाहिए, फिर मामला भले ड्राइवर्स की फीस का ही क्यों न हो।

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