IT कंपनी का CEO अपने ही बेटा-बेटी के साथ करता था दुराचार, दादी ने कराई शिकायत

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इंदौर| आकाश धोलपुरे|  इंदौर में अमानवीयता की हदे पार करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। एक पिता द्वारा अपनी ही 13 साल की बेटी, 11 साल के बेटे के साथ यौन दुराचार किया जा रहा था। इसकी शिकायत बच्चो की दादी ने पुलिस को की तो मामूली धाराओं में पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर लिया। इससे भी बढ़कर एसडीएम ने बच्चो की कस्टडी उसी पिता को देने के आदेश जारी कर दिया। पूरे मामले में कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए 13 लोगो को नोटिस जारी किये है। 

बेगलुरु की टेक माइंडर्स आईटी सर्विसेज इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ और एमडी विजेंद्र श्रीवास्तव पर उनके ही मासूम बच्चो से यौन शोषण करने का आरोप लगा है। बच्चे बेंगलुरु में पिता के साथ ही रहते थे।  गर्मी की छुट्टी में दादी के घर इंदौर आने पर बच्चो ने अपने पिता की करतूतों के बारे में दादी को बताया, जिसके बाद दादी ने लसुडिया पुलिस को इसकी शिकायत की।  वहा से महिला एवं बाल विकास अधिकारी को जानकारी दी गयी। जाँच के बाद महिला एवं बाल विकास अधिकारी ने लसुडिया पुलिस को पाक्सो एक्ट में प्रकरण दर्ज करने के आदेश दिए, लेकिन लसुडिया पुलिस ने मामूली धाराओं में प्रकरण दर्ज कर मामले की इतिश्री कर ली। इसके बाद दादी ने सीएसपी और एएसपी को मामले की शिकायत की, लेकिन उन्होंने भी इसमें कुछ एक्शन नहीं लिया | हद तो तब हो गई जब आरोपी पिता कनाडिया एसडीएम सोहन कनाश से बच्चो की कस्टडी के आदेश लिखवाकर ले आया। इसके बाद पुलिस बच्चो के घर पहुंची और बच्चो को उठाकर एसडीएम कार्यालय ले गई। 

मामले की जानकारी मिलने के बाद कलेक्टर लोकेश जाटव ने एसडीएम कनाश को फटकार लगायी और बच्चो को दादी के सुपुर्द किया। इसके 2 दिन बाद फिर से पुलिस बच्चो को लेने उनके घर पहुंची, लेकिन बच्चे न���ीं मिले। एडवोकेट विकास डागा ने बताया कि परेशान होकर बच्चो की दादी ने कोर्ट के सामने प्राइवेट कंप्लेंट की, जिस पर सुनवाई करते हुए एडीजे सविता सिंह ने बच्चो के पिता विजेंद्र श्रीवास्तव के खिलाफ पॉक्सो एक्ट में प्रकरण दर्ज करने के आदेश देते हुए विजेंद्र के दोस्त संजीव अमीन, एसडीएम कनाडिया सोहन कनाश, एएसपी शैलेन्द्र सिंह चौहान, सीएसपी पंकज दीक्षित, टीआई लसुडिया संतोष दुधी, महिला एसआई लिलियन मालवीय, जाँच अधिकारी राहुल काले और लसुडिया थाने के 5 अन्य पुलिसकर्मियों के खिआफ नोटिस जारी किया है।

हालांकि  यह बड़ा संवेदनशील मामला था, लेकिन पुलिस ने जिस तरह से इस मामले में काम किया है, उससे पुलिस द्वारा आरोपी से सांठगाठ किये जाने से इनकार नहीं किया जा सकता।वही एसडीएम द्वारा महिला एवं बाल विकास अधिकारी के आदेश की अवहेलना कर खुद भी संदेह की सूची में आ गए है।