Lumpy skin disease virus- इंदौर और आसपास के जिलों में लगातार बढ़ते मामलों ने बढ़ाई चिंता

राहत की बात है कि इंदौर संभाग में लंपी वायरस से 385 गांव प्रभावित हैं। लेकिन फिलहाल पशु स्वास्थ्य विभाग की मुस्तैदी के चलते ज्यादातर पशु रिकवर हो रहे है, बताया जा रहा है कि आसपास के इन गांवों में 2 हजार से ज्यादा पशुओं में लंपी वायरस पाए गए जबकि 1500 की रिकवरी हो चुकी है।

इंदौर, डेस्क रिपोर्ट। लंपी वायरस को लेकर पूरे प्रदेश में अलर्ट जारी है, सरकार और पशु स्वास्थ्य विभाग लगातार नजर बनाए हुए है, लेकिन उसके बावजूद  प्रदेश के अलग लग जिलों में मामले सामने आ रहे है, इंदौर संभाग के 385 गांवों में लंपी वायरस के गायों में लक्षण देखे गए है, बताया जा रहा है कि इन गांवों में 2 हजार से ज्यादा गाय-भैंस लंपी वायरस की चपेट में आ गई हैं। अकेले इंदौर में ही 81 गायों-भैंसों में लंपी वायरस पाया गया है, जबकि एक की मौत हुई है। वही इंदौर संभाग में दो दर्जन पशुओं की मौत की सूचना है। लगातार बढ़ते मामलों ने दहशत फैला दी है। इसे लेकर पशु चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग व प्रशासन हरकत में आ गया है। हालांकि सरकार ने रतलाम और अन्य राज्यों से सटे मध्यप्रदेश के कुछ जिलों में पहले ही पशुओं की खरीद फरोख्त पर रोक लगा दी थी साथ ही पशु मेले भी बंद करवा दिए थे लेकिन उसके बावजूद लंपी वायरस के बढ़ते मामलों ने चिंता बढ़ा दी है।

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हालांकि राहत की बात है कि इंदौर संभाग में लंपी वायरस से 385 गांव प्रभावित हैं। लेकिन फिलहाल पशु स्वास्थ्य विभाग की मुस्तैदी के चलते ज्यादातर पशु रिकवर हो रहे है, बताया जा रहा है कि आसपास के इन गांवों में 2 हजार से ज्यादा पशुओं में लंपी वायरस पाए गए जबकि 1500 की रिकवरी हो चुकी है। वही लंपी वायरस से प्रभावित पशुओं की मृत्यु दर काफी 1 से 2% (20 से 25 की मौत) है। इंदौर जिले में अब तक 81 पशुओं में लंबी वायरस पाया गया जबकि एक पशु की मौत हुई है। 72 संक्रमित पशुओं की रिकवरी हो चुकी है जबकि बाकी उपचाररत हैं।

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जानकारों की माने तो पशुओं को वैक्सीन भी लगाई जा रही है, हालांकि इस बीमारी से मनुष्य सुरक्षित है लेकिन पालतू पशुओं की लंपी वायरस से मौत पालकों के लिए तकलीफ बन रही है, माना जा रहा है कि इस वायरस का तेज रफ्तार से फैलने का सबसे बड़ा कारण ये है कि पशु इंफेक्टेड भी हो जाए तो भी 7 दिन तक इसका पता नहीं चलता। पता चलता है तब तक इंफेक्टेड पशु के संपर्क में आने से दूसरे पशु संक्रमित हो सकते हैं। एक्सपट्‌र्स का कहना है कि लंपी का कारण कैप्रिपॉक्स वायरस है। कोई भी पशु इस वायरस से इंफेक्ट होता है तो 7 दिन बाद धीरे-धीरे शरीर कमजोर पड़ने लगता है। पशु खाना पीना छोड़ देता है। वायरस सबसे पहले स्किन, फिर ब्लड और अंत में दूध पर असर डालता है। धीरे धीरे पशु उठ पाने की स्थिति में भी नहीं रह पाता और उसकी मौत हो जाती है।

क्या है लंपी रोग

पशु चिकित्सकों के मुताबिक इस रोग में जानवरों में बुखार आना, आंखों एवं नाक से स्राव, मुंह से लार निकलना, शरीर में गांठों जैसे नरम छाले पड़ना, दूध उत्पादन में कमी आना जैसे लक्षण दिखते हैं। इसके अलावा इस रोग में शरीर पर गांठें बन जाती हैं। गर्दन और सिर के पास इस तरह के नोड्यूल ज्यादा दिखाई देते हैं। बीमारी का पशुओं से मनुष्यों में ट्रांसफर होने की संभावना न के बराबर है।