RED ZONE इंदौर में कोरोना कंट्रोल करने में इसलिए आ रही है प्रशासन को दिक्कत, जानिये सच्चाई

इंदौर/आकाश धोलपुरे

रेड जोन में शामिल हॉट स्पॉट इंदौर इन दिनों राजनीति का भी हॅट स्पाट बनता जा रहा है दरअसल, यहां हॉट और हॅट में अंतर आ की मात्रा की गलती नहीं है बल्कि “प” और “र” की मात्रा की गलती है। मतलब वो प में आ की मात्रा पा और र में आ की मात्रा रा, जिसका राजनीतिकरण हो चुका है और ये राजनीतिक पारा इंदौर में कोविड के दौर में सातवें आसमान पर चढ़ चुका है। इस खबर के माध्यम से आज हम आपको इंदौर की उस हकीकत को बता रहे है जिसके बाद कोरोना के नियन्त्रण में आ रही कठिनाइयां जगजाहिर होगी।

दरअसल, इंदौर इस वक्त भगवान भरोसे है क्योंकि प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बुधवार को भोपाल में मीडिया को ये साफ कर दिया है कि कोरोना का प्रदेश में आना प्रदेश की तत्कालीन कांग्रेस सरकार की लापरवाही थी, जो वक्त रहते नही जागी। इधर, गृहमंत्री ने प्रदेश में कोरोना फैलने को लेकर इंदौर प्रशासन पर भी सवाल उठाए उन्होंने कहा की जिस वक्त इंदौर में विदेश से यात्री आ रहे थे उस वक्त न तो सरकार का ध्यान था और ना ही प्रशासन का। इंदौर से ही प्रदेश में कोरोना के मामले बढ़े है इस सच्चाई को इसलिए नही नकारा जा सकता है क्योंकि मार्च माह में ही सबकुछ हुआ जिसका परिणाम हर शहरवासी को भुगतना पड़ रहा है। इधर, कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित इंदौर में तो प्रशासन के लिए ऐसी मुश्किलें खड़ी हो गई है जिसका अंत होना मुमकिन नही लग रहा है।

दरअसल, इंदौर में प्रशासन को जमीनी तौर पर कोरोना की जंग में डटकर सामना करना है लेकिन इंदौर में स्थितियां कुछ अलग ही है जिसने खुद प्रशासनिक अधिकारियों को भौंचक्का कर रखा है। प्रशासन की मुश्किलें इसलिए बढ़ी हुई है क्योंकि जब से रियायतें देने की बातें सामने आई है तब से ही राजनीतिक दल और जनप्रतिनिधियों द्वारा बैठके लेना का सिलसिला जारी है। इन बैठकों का असर ये हो रहा है कि कभी प्रशासनिक अधिकारियों को सुझाव के लिहाज से ली जा रही अनगिनत बैठकों में हर रोज शामिल होना पड़ रहा है और ये ही वजह है कि रडार पर आने की बजाय प्रशासनिक अधिकारी बैठकों में शामिल होने का रास्ता ही मुनासिब समझ रहे है। सूत्रों के मुताबिक कई प्रशासनिक अधिकारी बैठकों के दौर से एक तरह से उकता गए हैं जिसके चलते कोरोना पर लगाम लगाने के लिए वो एकाग्र नही हो पा रहे हैं। दबी जुबां में तो कई अधिकारी अपनी इस पीड़ा को मीडिया के सामने भी जाहिर कर चुके हैं। वक्त है कोरोना से लड़ने का ऐसे में सवाल तमाम है लेकिन जवाब किसी के पास नही है क्योंकि जो जनता के प्रति जिम्मेदार है वो तो बैठकों में उलझे है वहीं जिनको जमीनी तौर पर काम करना है वो उलझन की स्थिति में है। ऐसे में इंदौर में कोरोना पर कैसे और कब काबू पाया जा सकेगा इस पर कुछ भी कहना और बताना जल्दबाजी होगी।