कोरोना के साइड इफेक्ट, रिक्शा चालकों की बढ़ी मुसीबतें, फाइनेंस कम्पनियां बना रही है दबाव

इंदौर, आकाश धोलपुरे। कोरोना काल के इस दौर में सबकुछ साफ है। कोरोना के इस संकट काल ने कई लोगों को बरबाद कर दिया है, किसी की रोजी रोटी छीन गई तो कोई काल के गाल में समा गए, लेकिन ऐसे समय में भी पुराने दौर के सूदखोरों की तर्ज पर कई टका ब्याज लगाने वाली आधुनिक फायनान्स कंपनियां उस दौर की याद दिला रही है, जिस दौर में चवन्नी और अट्ठनी ब्याज लगाकर गरीबों को खिदमतगार बना लिया जाता था।

 

 

कुछ ऐसे ही हाल वर्तमान में ऑटो रिक्शा चालकों के हो गए है। पहले से ही लॉक डाउन की मार झेल रहे रिक्शा वालों को वर्तमान में कोविड – 19 के दिशा निर्देशों का पालन कर अपना काम करना है। ऐसे कठिन दौर में भी फाइनेंस कंपनियां ना सिर्फ सूद याने की ब्याज की मांग रही है बल्कि मासिक किश्त के अलावा पेनाल्टी का दबाव बना कर रिक्शा चालकों की आफ़त में इजाफा कर रही है।

 

इसी का परिणाम है कि मिनी मुम्बई के रिक्शा चालकों ने आज ऑटो यूनियन के अध्यक्ष राजेश बिडकर के साथ जाकर प्रदेश के मंत्री तुलसी सिलावट से गुहार लगाई की हमे फ़ायनेंस कंपनियों के जाल से बचाओ और ऐसी कंपनियों पर लगाम लगाओं। जिसपर मंत्री से समस्या के निराकरण का आश्वासन दिया है। फिलहाल, फ़ायनेंस कम्पनी को लेकर मंत्री तुलसी सिलावट और सरकार का क्या रुख रहेगा ये तो वक्त बतायेगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here