भूमि के अवैध धंधों में लिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई, 750 करोड़ की 29 एकड़ भूमि को किया शासकीय घोषित

इंदौर, डेस्क रिपोर्ट। इंदौर जिले में भूमि के अवैध धंधों में लिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध कलेक्टर मनीष सिंह के निर्देशन में लगातार प्रभावी और बड़ी कार्रवाई की जा रही है। इसी सिलसिले में सोमवार को एक बड़ी कार्रवाई करते हुये लगभग 750 करोड़ रूपये मूल्य की 11.942 हेक्टेयर (लगभग 29 एकड़) भूमि को शासकीय घोषित किया गया। इस संबंध में अपर कलेक्टर डॉ. अभय बेड़ेकर के न्यायालय द्वारा आदेश पारित किये गये। संबंधित दोषियों दीपक मद्दा, दिलावर पटेल, सोहराब पटेल, इसलाम पटेल एवं जाकिर के विरूद्ध खजराना थाने में भारतीय दण्ड संहिता की धारा 420, 467, 468, 120 बी के तहत एफआईआर भी दर्ज कराई गई है।

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अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी डॉ. अभय बेड़ेकर ने बताया कि खजराना निवासी कृषक सोहराब एवं इस्लाम पिता आलम द्वारा न्याय नगर संस्था की अनुबंधित भूमि नियम विरूद्ध तरीके से अन्य संस्था त्रिशला गृह निर्माण सहकारी संस्था को विक्रय कर दिए जाने के संबंध में कलेक्टर श्री मनीष सिंह को शिकायत प्राप्त हुई थी। न्याय नगर संस्था के भूखण्ड से वंचित पीडित सदस्य संस्था से भूखण्ड प्राप्ति हेतु वर्षों से संघर्षरत थे। साथ ही साथ मेघना – त्रिशला गृह निर्माण सहकारी संस्था पीड़ितसंघ द्वारा अध्यक्ष गजेन्द्र गिरधारीलाल सेन एवं अन्य द्वारा शिकायत प्रस्तुत की गई कि संस्था के अध्यक्ष दीपक जैन उर्फ दीपक मद्दा उर्फ दिलीप सिसोदिया द्वारा उन्हें प्लॉट आवंटित नहीं किए जा रहे हैं और कई वर्षों से परेशान किया जा रहा है।

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ग्राम खजराना, इन्दौर सर्वे क्र. 172/1, 172/2, 173, 174 /3 रकबा 15.813 एकड़ अर्थात 6.402 हेक्टेयर की भूमि भूस्वामी कृषक  दिलावर, श्सोहराब एवं इस्लाम पिता आलम द्वारा न्याय नगर कर्मचारी सहकारी संस्था मर्यादित इन्दौर से अनुबंधित की गई थी, परन्तु उपरोक्त कृषकों द्वारा लालच में आकर न्याय नगर संस्था से अनुबंधित उपरोक्त सर्वे नम्बरों की भूमि बिना संस्था की जानकारी में लाए अन्य संस्था त्रिशला गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्या. तर्फे अध्यक्ष दिलीप पिता स्व. आनंदीलाल सिसोदिया को ग्राम खजराना स्थित भूमि खसरा क्रमांक 172/1 रकबा 1.251 हेक्टेयर, 172/2 रकबा 1.052 हेक्टेयर, 173/1 रकबा 2.967 हेक्टेयर, 174 /3 रकबा 0.802 हेक्टेयर कुल रकबा 6.072 हेक्टेयर की रजिस्ट्री की गई, जिसके कारण संस्था द्वारा सदस्यों को भूखण्ड आवंटन नहीं किया जा सका था। प्रार्थीगणों द्वारा अपनी कमाई एवं जमा पूंजी लगाकर संस्था में राशि जमा कराई गई थी एवं उक्त सर्वे नम्बर क्र. 172/1, 172/2 173, 174 /3 अंतर्गत प्लॉट प्रस्तावित किये गए थे। उपरोक्त लालची किसानों एवं भू माफियाओं द्वारा आपस में मिलकर न्याय नगर संस्था की भूमि खरीद फरोख्त की गई। उक्त भूमि इंदौर विकास प्राधिकरण की योजना क्रमांक 171 में समाहित होने की जानकारी भी दी गई है।

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प्रकरण में तथ्य इस प्रकार है कि खजराना निवासी कृषक सोहराब एवं इस्लाम पिता आलम द्वारा कुल 11.942 हेक्टेयर (लगभग 29 एकड़) भूमि जो शासन द्वारा अतिशेष भूमि न मानते हुए उन्हें पांच वर्षों के लिए मात्र कृषि कार्य हेतु 1983 में विमुक्त की थी, में से 15 एकड़ भूमि को शासन के आदेश का उल्लंघन करते हुए और शासन की अनुमति के बिना न्याय नगर गृह निर्माण सहकारी संस्था को 11 लाख रूपये एकड़ के हिसाब से विक्रय करने हेतु 1.73 करोड़ रूपये का अनुबंध किया था। तत्पश्चात यह भूमि अनुबंध अनुसार न्याय नगर संस्था को भी प्रदान नहीं करते हुए अन्य संस्था त्रिशला गृह निर्माण सहकारी संस्था तर्फे अध्यक्ष दिलीप सिसोदिया पिता आनंदीलाल सिसोदिया को विक्रय कर दी गई। उक्त 11.942 हेक्टेयर भूमि अतिशेष होने एवं शासकीय भूमि होने से तहसीलदार को खसरे में शासकीय भूमि दर्ज करने एवं कब्जा लेने हेतु आदेश दिए गए हैं।

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भारतीय दण्ड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज
जिला प्रशासन द्वारा भूमि के अवैध कार्यों में संलिप्त उक्त सभी व्यक्तियों के विरुद्ध आज खजराना थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई। सोहराब पिता आलम, इसलाम पिता आलम नायता, जाकिर पिता बाबु पटेल पता 45, खजराना गोया रोड तथा त्रिशला गृह निर्माण संस्था तर्फे दीपक मद्दा उर्फ दिलीप पिता आनंदीलाल सिसोदिया के विरूद्ध न्याय विभाग कर्मचारी गृह निर्माण सहकारी संस्था के साथ षडयंत्रपूर्वक धोखाधड़ी करने तथा धोखाधड़ी की नियत से भूमि के विक्रय किए जाने हेतु विक्रय पत्र में मिथ्या प्रविष्टि कर कूटरचना कर विधि विरुद्ध अनुबंध के जरिए भूमि को विक्रय करने पर भारतीय दण्ड संहिता की धारा 420, 467, 468, 120बी एवं अन्य सुसंगत धाराओं में खजराना थाना में आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया है। उल्लेखनीय है कि दीपक मद्दा के विरूद्ध अयोध्यापुरी, हिना पैलेस, और पुष्प विहार कॉलोनियों के भूमि घोटालों संबंधी अनेक अपराध जिला प्रशासन द्वारा पूर्व में पंजीबद्ध कराए गए हैं।