वीडियो में कॉलेज प्रबंधन को दोषी बताकर छात्र ने खाया जहर, अस्पताल में भर्ती

इंदौर| इंदौर में एक छात्र ने अपने शिक्षण संस्थान के खिलाफ रोष व्यक्त करते हुए जहर खाकर अपनी जान देने की कोशिश की। जहर खाने से पहले बकायदा सेकंड ईयर के छात्र ने एक वीडियो बनाया और उसमें कालेज प्रबंधन द्वारा दी जा रही प्रताड़ना का जिक्र करते हुए जहर खा लिया। मिली जानकारी के मुताबिक छात्र का नाम अजय मिश्रा है और उसने सितम्बर 2017 में इंदौर के झम्बूड़ी हप्सी रोड़ के अरिहंत नगर स्थित टैगोर शिक्षा महाविद्यालय में एडमिशन लिया था। छात्र मंगलवार को डीएवीवी जनसुनवाई में पहुंचा था और उसने अधिकारियों से शिकायत की थी कि कॉलेज को वो 1 लाख रुपए फीस के जमा कर चुका है और अब कॉलेज वाले 20 हजार की मांग कर रहे है।

शिकायत में छात्र ने बताया था कि टैगोर शिक्षा महाविद्यालय द्वारा उसका रिजल्ट नही दिया गया जिससे आहत होकर उसने पुलिस में भी आवेदन दिया था लेकिन बड़ी मुश्किल से पुलिस ने आवेदन स्वीकार किया था। अन्य स्टूडेंट्स के साथ जनसुनवाई में पहुंचे अजय मिश्रा के उस वक्त होंश उड़ गए जब उसे पता चला कि टैगोर शिक्षा महाविद्यालय का डीएवीवी से कोई एफिलिएशन नही है याने एडमिशन से लेकर एग्जाम तक में फर्जीवाड़ा हुआ है।  जनसुनवाई में ही छात्र ने सुसाइड करने की बात की थी और शुक्रवार को कॉलेज प्रबंधन और कॉलेज प्रबंधन के संजय पारिख के खिलाफत करते हुए जहर खा लिया। जिसके बाद उसे एम.वाय. अस्पताल ले जाया गया। छात्र के सुसाइड वीडियो से पता चलता है कि वह कॉलेज प्रबंधन की नीतियों के खिलाफ सभी स्टूडेंट्स के लिए लड़ाई लड़ रहा था लेकिन किसी का साथ ना मिलने के चलते उसने आत्मघाती कदम उठा लिया। 

वायरल वीडियो में अजय मिश्रा नामक छात्र ने बताया कि आज मैं बहुत ज्यादा दुखी हूं मैं आवाज उठा रहा हु सबके लिए लेकिन मुझे लगता है की मैं होपलेस हो चुका हूं। कोई मेरी मदद नही कर रहा है। मुझे खुद ही फंसाया जा रहा है। मेरे पास आखरी ऑप्शन सुसाइड का था। कॉलेज ने फर्स्ट सेमेस्टर का रिजल्ट दिए बिना सेकंड सेमेस्टर की एग्जाम करवा ली। इस कॉलेज का कुछ भी अता पता नही है और कॉलेज के बारे में हम जानते भी नही है कि ये कॉलेज क्या है। कॉलेज के एडमिशन काउंसलिंग फार्म में डीएवीवी से एफिलियेटेड लिखा था और एडमिशन कराने में बाद मुझे कॉलेज प्रबंधन द्वारा टॉर्चर किया गया और काम भी कराया जाता था जैसे कि झाड़ू लगवाना या फिर पोधो को पानी देना। कॉलेज में कोई बच्चे आते नही सब एग्जाम देने आते थे। इसके चलते मैंने आवाज उठाई लेकिन कॉलेज में 1 साल 4 महीने बीत जाने के बावजूद कॉलेज में कोई टीचर नही आया। टीचर की मांग रखने की बात पर संजय पारिख  सर ने मुझे ऑफिस में उठकर मारा और मुझसे गाली गलौच किया और इतना ज्यादा मानसिक रूप से टार्चर किया और कहा कि अगर तूने कुछ भी बोला तो लड़कियों से उल्टा बयान दिलवाकर मैं उल्टा तुझे जेल भिजवा दूंगा तो तू खुद ही फंस जाएगा। मैंने आप लोगो के लिए आवाज उठाई और आज मेरे साथ कोई भी नही है। सुसाइड के चलते मैं जिंदा रहा तो भी और मर गया तो भी आप लोग सच्चाई का पता लगाइयेगा जरूर। छात्र का फिलहाल इलाज जारी है लेकिन इस मामले के सामने आने के बाद एक बार फिर फर्जी तरीके से संचालित किये जाने वाले कॉलेजो की हकीकत सामने आई है और अब उच्च शिक्षा विभाग को ही ऐसे लोगो पर नकेल कसनी चाहिए ताकि इस तरह के मामले सामने ना आये ना ही स्टूडेंट्स के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो।