अधूरी रह गई सुषमा स्वराज की ये आखरी ख्वाहिश…

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इंदौर।

आज भले ही पूर्व विदेश मंत्री और बीजेपी की कद्दावर नेता सुषमा स्वराज हमारे बीच नही है, लेकिन देश विदेश में फंसे भारतीयों की मदद के लिए हमेशा उन्हें याद किया जाएगा।चाहे इराक में फंसी हुई नर्सों को सुरक्षित निकालना हो, कुवैत और दुबई में काम दिलाने के बहाने धोखा खाने वाले मजदूर हों या पाकिस्तान में फंसीं उजमा और मूक बधिर गीता की सकुशल वापसी हो। इनमें से सबसे खास रिश्ता सुषमा का गीता से रहा। सुषमा स्वराज, गीता के लिए मां की तरह ही थीं, वे गीता को हिन्दुस्तान की बेटी कहा करतीं थीं। 

विदेश मंत्री रहते हुए एक बार सुषमा स्‍वराज ने कहा था कि मैं जब भी गीता से मिलती हूं वह शिकायत करती है और कहती है कि मैडम किसी तरह मेरे माता-पिता को तलाशिये।सुषमा ने अपील करते हुए कहा कि जो भी गीता के मां बाप हों सामने आएं। उन्होंने कहा था कि मैं इस बेटी को बोझ नहीं बनने दूंगी। इसकी शादी, पढ़ाई की सारी जिम्मेदारी हम उठाएंगे।गीता के स्वदेश वापसी के अगले ही दिन उसे इंदौर में मूक-बधिरों के लिए चलाई जा रही गैर सरकारी संस्था के आवासीय परिसर में भेज दिया गया। बाद में उसके परिजनों की तलाश भी की गई।लेकिन गीता के माता-पिता कौन है, यह अब तक पता नहीं लग सका है। कई लोगों ने गीता को अपनी खोई हुई बेटी बताया था,लेकिन गीता के इंकार के कारण दावेदारों को निराश होना पड़ा। 

वही सुषमा स्वराज की बड़ी इच्छा थी कि कोई योग्य युवक गीता का हाथ थाम ले,उसकी शादी हो जाए, इसके लिए कई रिश्ते भी आए लेकिन कही बात बन नही पाई और मंगलवार की रात अचानक स्वराज इस ख्वाहिश को अपने दिल में लिए दुनिया से रुखसत हो गई।बीमार रहने के कारण स्वराज ने केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत को गीता की जिम्मेदारी सौंपी थी। गीता बैडमिंटन खिलाड़ी बनना चाहती है। गीता अभी इंदौर के हरनाम लक्ष्मी खुशीराम बघिर बालक छात्रावास में रह रही है। गीता को इंदौर लाने के पीछे सुषमा स्वराज की सोच थी कि यहां वह ज्यादा सुरक्षित रहेगी। शिवराज सिंह चौहान जब तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे वे भी गीता के खैर-खबर लेते रहते थे।

निधन की खबर सुनते ही फफक पड़ी गीता

स्वराज के निधन की खबर गीता को बुधवार सुबह दी गई। वह तब से बेहद दु:खी है और रोए जा रही है। लगातार लोगों और संस्था द्वारा उसे ढांढ़स बंधाया जा रहा हैं। इशारों में गीता ने कहा कि स्वराज के निधन के बाद उसे ऐसा लग रहा है कि मेरी मां चली गई, मैं अनाथ हो गई। अब मेरा ध्यान कौन रखेगा। मेरी मां जब भी इंदौर आईं मुझसे मिलीं। फोन पर भी मुझसे समय-समय पर बात करती थीं। बीमारी के चलते एक महीने से बात नहीं हो पा रही थी।गीता ने बताया कि एक महीना या 15 दिन में मेरी उनसे (सुषमा स्वराज) फोन पर बात हो जाया करती थी। पिछली दफा जुलाई में बात हुई थी।गीता ने बताया कि मैंने जुलाई में उनसे मिलने की इच्छा जताई थी, लेकिन उनके निजी सहायक ने बताया था कि उनकी तबीयत खराब है। उन्होंने मुझे केन्दीय मंत्री थावरचंद गहलोत के माध्यम से लैपटॉप भी दिलवाया था। साथ ही, यह भी कहा था कि अगर किसी चीज की ज़रूरत हो तो उन्हें बता दूं। । गीता बीते पांच साल में 8 बार स्वराज से मिल चुकी थी। 

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