सिन्धिया समर्थक मंत्री जी बोले, ‘प्रगति के लिये परिवर्तन’

इंदौर| आकाश धोलपुरे| Covid-19 को लेकर बीते कुछ दिनों से इंदौर (Indore) में सक्रिय प्रदेश के जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट (Minister Tulsi Silvat) ने आज इंदौर प्रशासन के अधिकारियों की बैठक ली | इस दौरान इंदौर सांसद शंकर लालवानी भी मौजूद थे। बैठक के दौरान कोरोना संकट के दौरान प्रशासनिक कार्यो सहित आने वाले समय मे एक्शन प्लान पर भी चर्चा की गई। इसके बाद मीडिया से मुखातिब हुए मंत्री सिलावट से कांग्रेस और बीजेपी सरकार में उनके दायित्व सहित सहजता को लेकर सवाल पूछे, लेकिन वो इन सभी सवालों के जबाव टालते रहे और उन्होंने खुद की और शिवराज सरकार की प्राथमिकता कोरोना से जंग को बताया। वही जब उनसे पूछा गया कि बीजेपी कार्यकाल में कितना फर्क आपको महसूस हो रहा है उन्होंने जबाव दिया कि अभी सबसे बड़ा संकट कोरोना है। दिल और दिमाग मे बस एक ही जुनून है कि इस संकट से कैसे ऊबरे। वही सहजता के सवाल पर वो कह बैठे कि परिवर्तन प्रगति का नियम है। बस मंत्री जी की जुबां से निकले शब्द ने बीते दिनों में हुए उलटफेर की कहानी बयां कर दी।

असल मे परिवर्तन के लिए कहा ये जाता है कि ‘परिवर्तन प्रकृति का नियम है’, लेकिन मंत्री जी ने तो प्रकृति के नियम को भुलाकर परिवर्तन को प्रगति का नियम बता डाला, अब यह प्रगति कैसी है सियासी गलियारे में इसकी चर्चा शुरू हो गई है । आज इंदौर में मीडिया द्वारा तमाम सवाल उठाए गए लेकिन एक ही जबाव ने सारे सवालों का जबाव दे डाला। क्योंकि मीडिया जानना चाह रहा था कांग्रेस सरकार में सिलावट की जिम्मेदारी और वर्तमान में बीजेपी सरकार में सिलावट को दी गई जिम्मेदारी में कितना अंतर आया है और वो कितना सहज खुद को महसूस कर रहे है| लेकिन कोरोना की आड़ में आखिरकार उनकी जुबां फिसली और निकलकर सामने आया कि वाकई परिवर्तन, प्रगति का नियम है।