Indore – महिला ने मचाया हंगामा, पहले से शादीशुदा पति की दुकान में की तोड़फोड़

Gaurav Sharma
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इंदौर, आकाश धोलपुरे। इंदौर (indore) के भंवरकुआं थाना क्षेत्र के भोलाराम उस्ताद मार्ग स्थित एक आइसक्रीम पार्लर (Ice cream parlor) में आज अचानक उस वक्त हंगामा(Ruckus) खड़ा हो गया जब नेहा पाटिल नामक एक महिला अपने पति से घर खर्च मांगने पहुंची। दरअसल, नेहा पाटिल की शिकायत है कि 3 साल पहले इंदौैर (indore) के  छोटा बांगड़दा (Chhota Bangarda)  में रहने वाले आनंद पाटिल ने खुद को अनाथ बताकर छावनी स्थित आर्य समाज मन्दिर (Arya Samaj Temple) में शादी कर ली थी और जून माह में नेहा को पता चला कि वो तो पहले ही शादीशुदा  (married)है और उसके दो बच्चे है।

जब इस बात की शिकायत (complaint)  महिला ने पति से की तो वो उससे मारपीट करने लगा और यहां तक कि जब वो अपने ससुराल वालों के घर पहुंची तो पहली पत्नि और ससुराल वालों ने भी उसके साथ मारपीट कर डाली। नेहा की माने तो पति के रुपयों के दबाव में आकर कोई उसकी सुनवाई भी नही करता है। इंदौर (indore)  के आर्य समाज मन्दिर (Arya Samaj Temple)  में हुई शादी को सबूत के तौर पर मीडिया के सामने रखने वाली नेहा ने आज उसके धोखेबाज पति की दुकान में तोड़फोड़ मचा दी।

 

हंगामे की सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों को भंवरकुआं थाना ले आई है, जहां प्रारंभिक तौर पर पुलिस को जानकारी मिली है कि युवक ने दूसरी शादी की है। अब पुलिस महिला के बयान के आधार पर धोखेबाज पति पर एफआईआर दर्ज करेगी। फिलहाल, महिला इस पूरे मामले में इंसाफ चाहती है और महिला ने तमाम आरोप भी नक्कारे पति पर लगाये है।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है।

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