हड़ताल से 20 हजार करोड़ का नुकसान, केंद्र सरकार पर बैंक तंत्र कमजोर करने का आरोप

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जबलपुर।

बीते 21 दिसंबर को देश भर के राष्ट्रीयकृत बैंको के लगभग 10 लाख से ज्यादा कर्मचारी 11वां वेतनमान और न्यू पेंशन स्कीम के विरोध में एक दिवसीय काम बंद हड़ताल की थी। अभी इस मुद्दे पर सरकार ने कोई कदम उठाया भी नहीं था कि अब एक बार फिर देश भर के बैंकों ने मर्जर को लेकर एक दिन की हड़ताल कर दी है। 

जबलपुर जिले के सिविक सेंटर में आज जिले भर के कर्मचारी-अधिकारी हड़ताल में शामिल हुए है। हड़ताल के चलते शहर की 200 बैंक शाखाओं के कर्मचारी कामबंद हड़ताल पर हैं। हड़ताली बैंक कर्मचारियों की माने तो 21 और 26 दिसंबर की हड़ताल में थोड़ा अंतर है। बीते दिनों जो हड़ताल हुई थी वो न्यू पेंशन स्कीम का विरोध और 11 वां वेतनमान को लेकर की गई थी। आज की जो हड़ताल है वो बैंकों के मर्जर को लेकर की गई है। बैंक अधिकारी संघ के उपमहासचिव की माने तो केन्द्र सरकार बैंकों को मर्ज करके उनके स्ट्रेक्चर को कमजोर कर रही है। जिसका मुख्य कारण ये है कि न्यू पेंशन स्कीम में जनता का जो ध्यान है उससे हट जाए। इसलिए सरकार बैंकों को मर्ज करने की चाल चल रही है।आज की इस हड़ताल से जबलपुर में चार से पांच करोड़ का लेनदेन प्रभावित हो रहा है जबकि पूरे देश भर में 10 से 20 हजार करोड़ का लेनदेन आज की हड़ताल से होगा। वही ये भी कहा जा रहा है कि बैंकों के मर्ज होने से उस क्षेत्र विशेष के लोगों पर बहुत बार प्रभाव पड़ेगा।आज की हड़ताल कर एक बार फिर चेतवानी दी गई है कि अगर इस सबके बाद भी मांगे नही मानी गई तो आने वाले समय मे अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी।