जबलपुर नगर निगम की इस बड़ी लापरवाही से महिला को नहीं मिल रहा शासन की योजना का लाभ, जाने क्या है मामला !

नगर निगम द्वारा जारी प्रमाण पत्र में महिला के पति की मौत की तारीख गलत लिख दी गई। जिसके चलते अब महिला को शासन की योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। और वो दर-दर भटकने को मजबूर है।

जबलपुर, संदीप कुमार। जबलपुर (Jabalpur) में नगर निगम (municipal Corporation) का एक ऐसा कारनामा सामने आया है। जिसे जो जान रहा है वह यही कह रहा है कि वाह रे “जबलपुर नगर निगम”। दरअसल दीनदयाल में रहने वाली एक महिला के पति की कुछ दिन पहले मौत हो गई थी। पति की मौत के बाद महिला को मुख्यमंत्री जनकल्याण योजना के तहत लाभ मिलना था। पर नगर निगम द्वारा जारी प्रमाण पत्र में महिला के पति की मौत की तारीख गलत लिख दी गई। जिसके चलते अब महिला को शासन की योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। और वो दर-दर भटकने को मजबूर है।

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एक साल से काट रही चक्कर
अब पीड़ित महिला बीते एक साल से नगर निगम जबलपुर में मृत्यु प्रमाण में सुधार के लिए चक्कर काट रही है। पति की मौत के बाद महिला पर ही अपने तीन बच्चों का पालन-पोषण करने की जिम्मेदारी आ गई है। जानकारी के मुताबिक महिला आरती चौधरी के पति की बीमारी के चलते 16 नवंबर 2018 को मौत हो गई थी। पति की मौत के बाद महिला ने मुख्यमंत्री जनकल्याण योजना के तहत मिलने वाली सहायता राशि के नगर निगम जोन क्रमांक-6 से फार्म लेकर भरा था। महिला के पति की मृत्यु 2018 में हुई पर प्रमाण पत्र में उसे साल 1900 में दर्ज करा दिया गया। जिसके कारण अब महिला को मुख्यमंत्री जनकल्याण योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। और अब वो नगर निगम के एक साल से चक्कर काट रही है।

जबलपुर नगर निगम की इस बड़ी लापरवाही से महिला को नहीं मिल रहा शासन की योजना का लाभ, जाने क्या है मामला !

पीड़ित महिला आरती चौधरी ने बताया कि पति की मौत के बाद उसके ऊपर अपने तीन बच्चो को पालने की जिम्मेदारी आ गई है। उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री जनकल्याण योजना के तहत मदद मिलेगी तो उससे उसके परिवार का भरण पोषण होगा। पर नगर निगम की लापरवाही के कारण आज तक उसे इसका लाभ नही मिल पा रहा है। फार्म में हुई गलती को लेकर पीड़ित महिला एक साल से नगर निगम के चक्कर काटकर थक गई है। इधर नगर निगम जबलपुर ने अपनी गलती को नजरअंदाज करते हुए अब पीड़ित महिला को भोपाल से फार्म में सुधार होने का हवाला दे रहे है। पीड़ित महिला का कहना है कि सहायता राशि फार्म में हुई गलती को लेकर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों सहित निगम के तमाम बड़े अधिकारियों को आवेदन दे चुकी है पर कहीं से मदद नहीं मिली है।

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