बीजेपी के इस गढ़ को भेदने कौन होगा कांग्रेस का चेहरा, 23 साल से है जीत की तलाश

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जबलपुर| प्रदेश बड़े शहरों की सीटों पर दोनों ही पार्टी के उम्मीदवारो को लेकर सस्पेंस बरकरार है। भोपाल, इंदौर और ग्वालियर में भाजपा तो जबलपुर मे कांग्रेस की ओर से उम्मीदवार पर अब ��क तस्वीर साफ नही हुई है। वो अलग बात है कि संभावित नामो की चर्चा सोशल मीडिया से लेकर राजनैतिक गलियारो मे चल रही है। बात जबलपुर संस्कारधानी की करें तो भाजपा की ओर से मैदान मे चौथी बार उतर रहे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने पूजन पाठ के साथ अपने चुनावी अभियान का शंखनाद भी कर दिया है लेकिन कांग्रेस में अब तक उम्मीदवार के नाम पर पेंच फसा हुआ है।

कांग्रेस से उम्मीदवार कौन होगा इसको लेकर चुनावी ततीखों के ऐलान के साथ ही चर्चा शुरू हो गई| इस दौरान कई नाम सामने आये, वहीं राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा को तो बधाईयाॅ देने का दौर भी शुरू हो गया है लेकिन सूत्रो के मुताबिक वो इस सीट से लड़ने के लिए तैयार नही है। कांग्रेस की ओर से दिख रहे इस रूख को लेकर भाजपा प्रत्याशी और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह बेफिक्र दिखते है । उनके मुताबिक कांग्रेस किसी न किसी को तो मैदान मे उतारेगी , जो भी हो लेकिन जनता का साथ उन्हे ही मिलेगा और शहर की जनता एक बार फिर जबलपुर सीट से उन्हे विजयी बनाएगी।

जबलपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस की ओर से उम्मीदवार को लेकर हो रही देरी इस बात को दर्शाती है कि कही न कही इस सीट को लेकर वह चिंतित है|ऐसा इसलिए भी क्योंकि 1996 से लगातार ये सीट भाजपा के कब्ज़े मे है और हर बार भारी मतो से जीत भाजपा की हुई है। कांग्रेस के लहज़े से अगर बात करें तो जबलपुर सीट भी कांग्रेस के लिए टफ सीटो मे से एक है ऐसे मे जिस फाॅर्मुेले को लेकर कांग्रेस टिकिट बांट रही है तो उसे इस सीट से भी किसी वरिष्ठ नेता को चुनाव मैदान मे उतार सकती है, या कोई बाहरी नेता भी इस सीट पर उतर सकता है इसको लेकर भी चर्चा है| प्रदेश की अन्य सीटों पर जिस तरह कई बड़े नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं, ऐसा जबलपुर में देखने को नहीं मिल रहा है, वहीं पार्टी नेताओं ने भी पत्ते नहीं खोले हैं जिसको लेकर अब राकेश सिंह के सामने कांग्रेस का चेहरा कौन होगा इसको लेकर सस्पेंस बढ़ गया है| 

23 साल से भाजपा का कब्जा, कांग्रेस को जीत की तलाश 

महाकोशल की राजनीति के केन्द्र जबलपुर लोकसभा सीट में पिछले 23 साल से भाजपा का कब्जा है। अब इस गढ़ को बचाने के लिए एक बार फिर भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशी आमने-सामने होंगे।  जबलपुर लोकसभा क्षेत्र में 8 विधानसभा सीट हैं। सभी विधानसभा क्षेत्र जबलपुर जिले की सीमा में ही हैं। वर्तमान में इनमें से भाजपा और कांग्रेस का 4-4 सीटों पर कब्जा है। इसलिए इस बार मुकाबला भी कांटे का होने की संभावना व्यक्त की जा रही है।