सूपाताल तालाब में मछलियों के मंरने का सिलसिला जारी, इलाके में महामारी का अलर्ट

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जबलपुर| शहर के बीचोबीच स्थित सूपाताल तालाब में बीते 1 सप्ताह से मछलियों के मरने का सिलसिला लगातार जारी है।अचानक से इतनी तादाद में मछलियों के मरने से मछुआरों के माथे पर चिंता की लकीरें आ गई है।बीते 1 सप्ताह में करोड़ों रुपए की मछली मरने की संभावना जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि तालाब में ऑक्सीजन कम होने के चलते यह स्थिति बनी है लिहाजा जिला प्रशासन ने तालाब में एक ऑक्सेजनेटर लगाया है जबकि आसपास के जिलों से और भी ऑक्सेजनेटर मंगवाए गए हैं। सूपाताल तालाब में बीते 60 सालों से मछुआरे मछली पालकर अपनी आजीविका चला रहे हैं पर इस मर्तबा अचानक से मछलियों के मरने से मछली पालकों को करोड़ों का नुकसान हुआ है।मछुआरों का कहना है कि आसपास के गंदे नालों का पानी आकर तालाब में मिल रहा है कई बार नगर निगम को इसकी सूचना भी दी गई पर इस और कोई ध्यान नहीं दिया गया।यही वजह है कि नगर निगम की लापरवाही के चलते मछुआरों को करोड़ों रुपए का नुकसान उठाना पड़ा।इधर बड़ी तादाद में मछलियों के मरने के चलते आसपास के इलाके में महामारी फैलने का खतरा मंडराने लगा है।बीच शहर में स्थित सूपातालताल तालाब में इतनी ज्यादा मात्रा में मछलियों के मरने पर जिला प्रशासन के भी हाथ पांव फूल गए हैं।कलेक्टर छवि भारद्वाज का कहना है कि जांच के दौरान यह पाया गया है कि तालाब में ऑक्सीजन की कमी हो गई थी जिसके चलते ही इतनी बड़ी तादाद में मछलियां मर रही है।हालांकि मत्स्य विभाग ने तालाब में एक ऑक्सेजनेटर लगाया है चूँकि तालाब काफी बड़ा है ऐसे में सिर्फ एक ऑक्सिजनेटर से काम नहीं हो पाएगा लिहाजा अन्य जिलों से भी इसको मंगवाया जा रहा है। सिर्फ 1 सप्ताह में करोड़ों रुपए की मछली मरने से मछुआरे सड़क पर आ गए हैं इधर कलेक्टर ने तहसीलदार को निर्देश दिए हैं कि वह नुकसान का आकलन करें जिसके चलते मछुआरों को मुआवजा दिया जाए।