अच्छी पहल: एमपी की इस जेल में सजा के साथ ‘शेफ’ बनने की ट्रेनिंग ले रहे कैदी

जबलपुर।

 जेल में अपने गुनाहों की सजा काट रहे बंदी बाहर निकलने के बाद फिर से अपनी जिंदगी को नए सिरे से संवार सकें….इसके लिए शासन कई तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चला रही है। बंदियों को हथकरघा, हैंडलूम, सिलाई, बुनाई,फर्नीचर निर्माण जैसे काम जेल के अंदर सिखाए जा रहे थे। लेकिन अब इस कड़ी में एक कदम और आगे बढ़ते हुए शासन ने बंदियों को मल्टी कुज़ीन फ़ूड बनाने में दक्ष करने की योजना पर काम शुरू कर दिया है।जी हां अब जेल में ही बंदियों को शैफ का काम भी सिखाया जा रहा है।

बीते कई सालों से अपने गुनाहों की सजा जेल में काट रहे हैं कैदी अब बढ़िया लजीज खाना बनाकर खिलाएंगे।ये सुनने में आश्चर्य जरूर लगेगा पर जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस सेंट्रल जेल के बंदी हैं अब मल्टी कुज़ीन फ़ूड बनाने में दक्ष हो रहे है।केंद्र शासन की कौशल विकास योजना के तहत जेल में बंद कैदियों को मल्टी कुज़ीन फ़ूड के साथ बेकरी में बनने वाली चीजों को बनाने का हुनर सिखाया जा रहा है ताकि वह जब सजा काट कर जेल से बाहर जाए तो अपने हुनर के मुताबिक स्वरोजगार जनरेट कर फ़ूड कोर्ट खोल लोगों को एक से बढ़कर एक लज़ीज़ व्यंजन बनाकर खिला सकें।जबलपुर केंद्रीय जेल में बीते 6 महीने से बंदियों को दी जा रही है।

बंदियों को जेल में ही सूप,पास्ता,पीज़ा,नूडल्स सहित वेज,नॉनवेज खाने के साथ केक,बिस्किट,पेस्ट्री जैसे चीजो के बनाने की ट्रेनिंग दी जा रही है।इसके लिए जेल प्रशासन को केंद्र सरकार ने खास किया है।खास बात तो यह है कि बंदियों को तरह तरह का खाना कैसे बनाया जाता है इसका ज्ञान देने के लिए देश के राजस्थान,हिमाचल,गुजरात सहित कई राज्यो के एक्सपर्ट ट्रेनिंग देने आए हुए है। जबलपुर की नेता जी सुभाष चंद्र बोस सेंट्रल जेल में आज करीब 22 सौ से ज्यादा कैदी अलग-अलग अपराधों में सजा काट रहे है जिसके चलते केंद्र सरकार की  योजना के तहत 30-30 बंदियों को मल्टी कुज़ीन फ़ूड और बेकरी में बनने वाली चीजों की ट्रेनिंग के दी जा रही है।

ट्रेनिंग पूरी होने के बाद बंदियों की बाकायदा परीक्षा भी ले जाएगी।जेल प्रशासन के अधिकारियों का कहना है इस योजना का मकसद केवल बंदियों को व्यंजन बनाने का तरीका सीखना ही नहीं बल्कि इसके जरिए उनको समाज की मुख्यधारा से जोड़ कर उन्हें खुद के पैरों में खड़ा करना है ताकि जब वह अपनी सजा पूरी कर जेल से बाहर निकले तो समाज में सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर सकें। समाज से भटके हुए इन लोगों को राह पर लाने के लिए जेल प्रशासन की ये पहल वाकई काबिले तारीफ है इन बंदियों के मनों में जो नकारात्मक ऊर्जा भर चुकी है उसे उनके अंदर आत्म विश्वास जगाकर ही मिटाया जा सकता है।