हाईकोर्ट ने ईवीएम, वीवीपैट पर रोक लगाने से किया इन्कार

जबलपुर, डेस्क रिपोर्ट। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में आगामी चुनावों में ईवीएम और वीवीपैट के इस्तेमाल पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमठ व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने कहा कि हम इसमे किसी कानूनी प्रावधान का उल्लंघन नहीं पाते, जिसके आधार पर कोर्ट के हस्तक्षेप की आवश्यकता हो।  चुनाव आयोग को कानूनों के तहत प्रतिपादित कई प्रक्रियाएं करनी होती हैं, जो वे कर रहे हैं। अगर किसी कानून का उल्लंघन होता है तो उसके लिए उपचार उपलब्ध हैं।

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मध्य प्रदेश जन विकास पार्टी के अध्यक्ष जबलपुर निवासी मोतीलाल अहिरवार की ओर से यह याचिका दायर की गई। अधिवक्ता सुनील कुमार सिंह ने याचिका प्रस्तुत कर कोर्ट को बताया कि चुनावों में वोटिंग के लिए इस्तेमाल की जाने वाली ईवीएम में कई गड़बड़ियां हैं। इसके निर्माण, ट्रांसपोर्ट, रेंडमाइजेशन, सिम्बल लोडिंग जैसे कई चरण होते हैं। यह सभी चरण निर्माण करने वाली कम्पनियों के जिम्मे होते हैं, जिसके चलते अनियमितताएं होती हैं। जबकि ये सभी कार्य चुनाव आयोग द्वारा किए जाने चाहिए। राहत चाही गई कि चुनाव आयोग को इन मशीनों की गड़बड़ियां दूर करने के निर्देश दिए जाएं। ताकि चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी हो सके। मशीन निर्माताओं को निष्पक्ष व पारदर्शी प्रमाणित करने के निर्देश दिए जाएं। पोलिंग बूथ में गणना की अनुमति न हो। इनके सहित कुल 12 बिंदुओं पर राहत चाही गई। तर्क दिया गया कि ईवीएम और वीवीपैट मशीनों को डिजिटली रिमोट कंट्रोल किया जा सकता है। ईवीएम व वीवीपैट की गड़बड़ी के कई मामले प्रकाश में आए हैं। इन आशंकाओं को समाप्त करने के लिए वैकल्पिक चुनाव पद्धति अपनाई जा सकती है। आग्रह किया गया कि निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए ईवीएम, वीवीपैट पर प्रतिबंध लगाया जाए। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ सेठ ने याचिका में चाही गई राहतों को अनुचित बताते हुए विरोध किया। अंतिम सुनवाई के बाद कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से मना कर याचिका निरस्त कर दी।