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जबलपुर, संदीप कुमार। मध्यप्रदेश की सड़कों पर हुई धमाचौकड़ी को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की गयी थी। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक तथा जस्टिस वी के शुक्ला की युगलपीठ को बताया गया कि दो साल से अधिक समय गुजर जाने के बावजूद सरकार द्वारा किसी प्रकार का ट्रैफिक प्लाॅन तैयार नहीं किया गया है। जिसे गंभीरता से लेते हुए युगलपीठ ने प्रदेश के परिवहन सचिव से हलफनामे में जवाब मांगा है।

अवैध ऑटो संचालन को लेकर हाई कोर्ट हुआ सख्त
युगलपीठ ने इस पूरे मामले में सख्त रूख अपनाते हुए कहा कि जवाब संतुष्टिजनक नहीं रहा तो परिवाहन सचिव को तलब किया जायेगा। सतना बिल्डिंग निवासी अधिवक्ता सतीश वर्मा और नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच की ओर से दायर याचिकाओं में कहा गया है कि शहर की सड़कों पर बेखौफ होकर चलने वाले ऑटो लोगों की जान के दुश्मन बने हुए हैं। ऐसे ऑटो न सिर्फ शहर की यातायात व्यवस्था चौपट करते हैं, बल्कि इस हद तक सवारियों को बैठाते हैं कि हमेशा उनकी जान का खतरा बना रहता है।

नहीं होता है ट्रैफिक नियमों का पालन, मूक दर्शक बनी पुलिस
याचिका में कहा गया है कि सवारी बैठाने के लिए ऑटो चालक बीच सड़क में कहीं भी वाहन रोक देते है। शहर की सड़कों पर धमाचौकड़ी मचाने वाले ऑटो के संचालन को लेकर कई बार सवाल भी उठे लेकिन जिला प्रशासन अब तक उनके खिलाफ कोई ठोस कदम उठा पाने में नाकाम रहा है।

याचिका की सुनवाई के दौरान युगलपीठ को बताया गया कि हाईकोर्ट ने जनवरी 2019 में नये ऑटो के परमिट पर रोक लगा दी थी। इसके आदेश के पूर्व 700 से अधिक ऑटो विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत खरीदे गये गये और आरटीओं के समक्ष परमिट के लिए आवेदन किया गया था। दूसरी तरफ आरटीआई के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार शहर में नो हजार ऑटो संचालित हो रहें है। जिसमें से 5 हजार ऑटो का संचालन अवैध तरीके से हो रहा है। चलानी कार्यवाही कर अवैध ऑटो को छोड़ दिया जाता है और वैध ऑटो को परमिट जारी नहीं किये जा रहे हैं।

युगलपीठ को यह भी बताया गया कि सरकार की तरफ से पेश किये गये जवाब में कहा गया था कि शहर की टैफिक व्यवस्था को सुधारे के लिए दिल्ली की एक संस्था से सर्वे करवा जा रहा है। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर टैफिक व्यवस्था को दुरूस्त करने योजना तैयार की जायेगी। दो साल से अधिक का समय गुजर जाने के बावजूद भी टैफिक व्यवस्था को सुधारने कोई योजना तैयार नहीं की गयी है।

सुनवाई के दौरान दिए गए निर्देश
युगलपीठ ने सुनवाई के बाद इस संबंध में परिवाहन सचिव को हलफनामे में जवाब पेश करने निर्देश जारी किये हैं। युगलपीठ ने पूर्व में जारी आदेश में संशोधन करते हुए कहा है कि 19 जनवरी 2019 से पहले खरीदे गये ऑटो को परमिट दिये जाये। याचिका पर अगली सुनवाई 15 फरवरी को निर्धारित की गयी है। याचिका की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आदित्य संघी तथा ऑटो डीलर्स एसोसिएशन की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ ने पैरवी की।