जल्दबाजी के प्रयास में सैंकड़ों लोग रोजाना ऐसे करते हैं जोखिम भरा सफर

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जबलपुर | जबलपुर में मां नर्मदा तट के ग्वारीघाट मैं रोजाना इस पार से उस पार सैंकड़ों लोग अपनी जान जोखिम में डालकर नाव में मौत का सफर करने को मजबूर है।आलम यह है कि नाव संचालक प्रति व्यक्ति से अच्छी खासी रकम लेकर जहां अपना व्यापार कर रहे हैं तो वही सालों से चल रहे इस पार से उस पार के सफर पर जिला प्रशासन को खबर ही नहीं है।नर्मदा के ग्वारीघाट घाट में इस पार से उस पार जल्दबाजी के प्रयास में सैंकड़ों लोग रोजाना अपनी जान जोखिम में डालकर नर्मदा नदी पार करते हैं। दरअसल नदी के उस पार करीब एक दर्जन से ज्यादा गांव बसे हुए हैं जहां से आने के लिए वहां के लोग सुबह नाव का सहारा लेते हैं और फिर शाम को इस पार से उस पार जाते हैं।हालांकि  जबलपुर शहर से गांव तक जाने के लिए सड़क भी है पर जल्दी पहुंचने के प्रयास में ज्यादातर लोग रोड के स्थान पर नदी का प्रयोग करते हैं। रोजाना सफर करने वालों से जब हमने बात की तो उनका कहना था कि हम कई सालों से इस तरह का सफर वो कर रहे हैं पर आज तक कुछ नहीं हुआ है हालांकि हादसे का डर उन्हें जरूर सताता है पर मजबूरी और कम समय में अपने गांव तक पहुंचने को लेकर रोजाना यह लोग इस तरह का सफर करते हैं।उमा भारती के मुख्यमंत्री रहते हुए घोषणा की गई थी कि नर्मदा नदी के ग्वारीघाट में पुल बनाया जाएगा जिससे कि नदी पार रहने वाले गांव के ग्रामीण इस पार से उस पार आसानी से आ जा सकते हैं पर किसी कारणवश पुल की योजना बनते बनते भी नहीं बनी।लिहाजा उनके ना बनने के कारण आज भी लोग अपनी बाइक के साथ नाव में ही इस पार से उस पार आ जा रहे हैं।नाव संचालक की मानें तो पुल न होने के चलते आमजन की सेवा के लिए वह नाव चला रहे हैं हालांकि पुल को लेकर वित्त मंत्री तरुण भनोट लगातार प्रयास कर रहे हैं और जब तक पुल नहीं बन जाएगा तब तक गांव के लोगो का सफर करना भी बंद नहीं होगा।

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