जबलपुर।

देश समेत प्रदेश में सियासत का केंद्र रहे गोवंश को लेकर बातें तो बहुत हुई लेकिन कोई स्थाई उपाय इनके संरक्षण के लिए नहीं निकल पाया। प्रदेश में सरकार बदलने के बाद सत्ता में आई कांग्रेस ने गांव से लेकर बड़े शहरों में गौशाला स्थापित करने की घोषणा की। कहने को अभी भी गौवंश सड़कों पर देखने को मिल सकता है लेकिन जल्द ही इनके दिन फिरने वाले हैं । 

घोषणा के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत स्तर पर गौशाला निर्माण का काम चल रहा है। बात जबलपुर की करें तो यहां 24 स्वीकृत गौशालाओं में से 22 गौशालाओं का निर्माण प्रगति पर है और अगले 1 महीने में इनका काम भी पूरा हो जाएगा।  जबलपुर के 88 ग्राम पंचायतों में कुल 7 ब्लॉक आते हैं प्रत्येक ब्लॉक में अनुपात के तहत 3-3 गौशालाए बनाई जा रही हैं। जबकि जबलपुर के शहरी क्षेत्र में एक बड़ी गौशाला का निर्माण भी चल रहा है जिसमें करीब दो से तीन हजार की संख्या में आवारा पशु रखे जा सकेंगे।

 जिला पंचायत के सीईओ प्रियंक मिश्रा के मुताबिक मनरेगा के तहत ग्रामीण क्षेत्रो मे गौषालाओ का निर्माण होगा जिसके लिए अलग से कोई बजट का प्रावधान नही है। ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माणाधीन गौशालाओं का संचालन ग्राम पंचायत ही करेंगी। गौशालाओं में चारा ,पानी ,बिजली की पूरी व्यवस्था की जाएगी ताकि कोई भी परेशानी ना हो सके । इस मामले में एक अनोखा प्रयास भी जबलपुर जिले में किया जाएगा सरकारी मदद से बन रही इन गौषालाओ में पंचगव्य पर भी बड़ा काम होगा । 

जिला पंचायत सीईओ प्रियंक मिश्रा ने बताया कि सभी गौशालाओं में आवारा पशु ,,,जो कि दुधारू गांव नहीं होती हैं उन्हें रखा जाता है। ऐसे में गौशालाओं के संचालन का न्यूनतम खर्चा निकल सके इसके लिए पंचगव्य पर काम किया जाएगा । स्व सहायता समूह को इसके लिए अलग से ट्रेनिंग भी दी जाएगी जिसमें गाय के गोबर और मूत्र से बनने वाले अनेक उत्पादों को बनाया जाएगा। जिला प्रशासन इसके लिए विटनरी विश्वविद्यालय की भी सहायता लेगा जिसमें गाय के मल मूत्र से बनने वाले अनेक उत्पादों की ट्रेनिंग स्व सहायता समूह के सदस्यो को दी जाएगी।