जब डॉक्टरों ने विरोध प्रदर्शन में बंद कर दिए मृत शवों के पोस्टमार्टम, परिजनों को हुई परेशानी

डॉक्टरों ने 10 बजे से लेकर 1 बजे तक पोस्टमार्टम नही किया जिसके चलते परिजन बॉडी लेने के लिए परेशान होते रहे

जबलपुर, संदीप कुमार। राजस्थान के दोसा जिले में एक महिला मरीज की मौत हो जाने बाद स्थानीय पुलिस ने महिला डॉक्टर के खिलाफ 302 लगाकर अपराध पंजीबद्ध कर लिया था, तनाव में आकर डॉ. अर्चना शर्मा ने आत्महत्या कर ली, इस घटना के बाद आग के लपटे जबलपुर (jabalpur) में भी नजर आ रही है,राजस्थान पुलिस के खिलाफ जबलपुर के डॉक्टरों ने विरोध प्रदर्शन किया इस दौरान कई घन्टो तक मेडिकल कॉलेज में पोस्टमार्टम को रोक दिया गया।

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महिला डॉक्टर की मौत के मामले में आज जबलपुर मेडिकल कालेज के पोस्टमार्टम विभाग के डॉक्टरों ने पोस्टमार्टम न करके अपना विरोध जताया,इस दौरान करीब 2 से 3 घण्टे तक डॉक्टरों ने मृत शवो का पीएम नही किया,वही डॉक्टरों ने विरोध जताते हुए काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया, मेडिकल पोस्टमार्टम विभाग ने कम बंद हड़ताल करते हुए काली पट्टी बांधकर, पुलिस के फैसले का विरोध किया है, म्रत शव को पोस्टमार्टम के बाद पाने के लिए परिजन परेशान होते रहे।

जब डॉक्टरों ने विरोध प्रदर्शन में बंद कर दिए मृत शवों के पोस्टमार्टम, परिजनों को हुई परेशानी

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डॉक्टरों ने 10 बजे से लेकर 1 बजे तक पोस्टमार्टम नही किया जिसके चलते परिजन बॉडी लेने के लिए परेशान होते रहे, मेडिकल पीएम विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. विवेक श्रीवास्तव ने बताया कि डॉक्टर इलाज के दौरान पूरी कोशिश करता है कि वह मरीज को बचा ले लेकिन राजस्थान पुलिस ने अधिक खून बहने के कारण हुई मरीज की मौत के बाद डॉक्टर के खिलाफ 302 का अपराध कायम कर डाला जो सरासर गलत है,डॉ. विवेक ने बताया कि गांव में चिकित्सा व्यवस्था पर्याप्त नहीं होती है ऐसे में अगर मरीज की मौत हो जाती है डॉक्टर पर मामला दर्ज होता है यह वजह है कि डॉक्टर गाँव जाना पसंद नही करते है,वहां जाने से परहेज करते है। यदि शासन डॉक्टरों को समुचित सुरक्षा व्यवस्था दे तो डॉक्टर गांवों में जाकर इलाज करें, लेकिन यदि डॉक्टरों के साथ ऐसा होगा तो इसका विरोध जरुरी है।