मौसा-मौसी के हत्यारे को निचली अदालत ने दी फांसी की सजा, हाई कोर्ट ने फैसले को रखा सुरक्षित

MP High Court : जमीनी विवाद में मौसा मौसी की हत्या करने के आरोपी को निचली अदालत से मिले फांसी की सजा के मामले पर आज हाई कोर्ट में सुनवाई हुई, हाई कोर्ट ने सुनवाई के बाद फैसले को सुरक्षित रख लिया है।

सिंगरौली जिले में 2014 को जमीनी विवाद के चलते एक युवक ने अपने मौसा-मौसी को मौत के घाट उतार दिया था। घटना का खुलासा तब हुआ जब दोनों का शव कुएं में तैरता मिला। घटना के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर निचली अदालत में पेश किया जहां उसे फांसी की सजा सुनाई गई। निचली अदालत ने फांसी की सजा के मामले में हाई कोर्ट में सुनवाई हुई और अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया। जस्टिस सुजय पाल व जस्टिस पी सी गुप्ता की खंडपीठ ने सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखा है।

आपको बता दें कि मौसा-मौसी की हत्या के आरोप में आरोपी रामचग को सिंगरौली की कोर्ट ने 27 नवंबर 2019 को फांसी की सजा सुनाई थी। रामजग पर पहले भी हत्या का आरोप लगा था जिसमें उसे फांसी हुई थी लेकिन बाद में उसे इस मामले में बरी कर दिया गया, इसी आधार पर सिंगरौली सत्र न्यायालय ने अपराधी रिकॉर्ड देखते हुए उसके फांसी की सजा सुनाई थी।

आरोपी रामजग की ओर से अधिवक्ता अरविंद पाठक ने कोर्ट को बताया कि निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में 2019 में चुनौती दी गई थी, कोरोना लेकिन संक्रमण के कारण फैसला नहीं आया अब इस मामले में पुनः सुनवाई हुई। फांसी की सजा की पुष्टि के लिए मामला हाईकोर्ट पहुंचा, आरोपी के वकील ने दलील दी है कि इस मामले में कोई भी चश्मदीद गवाह नहीं है और केवल पुराना आपराधिक रिकॉर्ड होने पर इतनी बड़ी सजा ना दी जाए।

जबलपुर से संदीप कुमार की रिपोर्ट