मध्य प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट में पेश किया ओबीसी वर्ग का डाटा, पढ़े पूरी खबर

सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार 13.66% ओबीसी आबादी सरकारी नोकरी में है तैनात, कुल 3 लाख 21 हजार 944 मंजूर पद में से ओबीसी के 43,978 पद,16 अगस्त को होना है फाइनल सुनवाई

Jabalpur News

जबलपुर, संदीप कुमार। मध्य प्रदेश सरकार (madhya pradesh government) ने हाईकोर्ट (Highcourt) में ओबीसी (OBC) वर्ग का डाटा पेश कर दिया है, सरकार के डाटा के अनुसार मध्य प्रदेश में सरकारी सेवाओं में कुल 43 हजार 978 लोग कार्यरत है यानी कि, ओबीसी की आबादी का 13.66% लोग सरकारी नौकरी में है। कुल स्वीकृत पद 3 लाख 21 हजार 944 में से ओबीसी को 43,978 पद मिले है। जबकि मध्य प्रदेश मे ओबीसी की एक आंकड़े के मुताबिक प्रदेश में ओबीसी की आबादी 51% है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों के अनुरूप अभी पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट हाई कोर्ट में पेश किया जाना बाकी है।

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ओबीसी को 27% आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट में लड़ाई चल रही है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय मेंओबीसी आरक्षण को लेकर कई मामले विचारधीन है। उक्त प्रकरणों में साल 2019 से लगभग 38 बार सुनवाइ हो चुकी है 16 अगस्त को भी मामले में फाइनल सुनवाई होना है। मध्य प्रदेश में पहली बार दिनांक 17/11/1980 को रामजी महाजन आयोग का गठन किया गया था, जिसके बाद महाजन आयोग ने दिनांक 22.12.1983 को ओबीसी को 35% आरक्षण सहित कई अनुशंसाए करके प्रतिवेदन शासन को दे दिया था, जिसे आज दिनांक तक लागू नहीं किया गया है | जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट मे एक जनहित याचिका कर्मांक WP/345/2014 दाखिल करके चुनौती दी गई थी, की पुरे देश मे ओबीसी को 27% आरक्षण दिया जा रहा है।

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याचिका में इंद्रा शहनी बनाम भारत संघ प्रकरण, जिसमें सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की बैंच द्वारा ओबीसी की 52.8% जनसंख्या मान कर, क्रीमीलेयर की शर्तों के साथ 16/11/1992 में मण्डल कमीशन की रिपोर्ट को मान कर, ओबीसी को शासकीय सेवाओं मे 27% आरक्षण का लाभ दिए जाने के निर्देश दिए गए थे | उक्त फैसले के विपरीत मध्य प्रदेश में ओबीसी को सिर्फ 14% ही आरक्षण दिया गया जो आज भी दिया जा रहा है | उक्त याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए मध्य प्रदेश सरकार को 2016 में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था , जिसका जबाब दाखिल करने के पहले ही मध्य प्रदेश सरकार ने दिनांक 08/3/2019 को ओबीसी को 27% आरक्षण लागू किया गया | उक्त याचिका कर्मांक WP ( C ) 345 /2014 आज भी बिचारधीन है।