सेना की सबसे ताकतवर धनुष तोप और सारंग गन का एक साथ परीक्षण

जबलपुर।संदीप कुमार।
भारतीय सेना सहित पूरे देश और खासकर जबलपुर के लिए आज का दिन ऐताहसिक रहा है।आज लांग प्रूफ रेंज में देश की सबसे बड़ी धनुष तोप और सारँग गन की मारक क्षमता का सफल परीक्षण किया गया।इस मौके पर डीजीक्यु के लेफिटनेंट जनरल संजय चौहान सहित सेना के कई अधिकारी मोजूद रहे।खमरिया एलपीआर(लांग प्रूफ रेंज) में आज सेना के अधिकारियों के सामने 155 एमएम की धनुष तोप के तीन राउंड फायर किए गए जबकि घनुष बेरल के चार राउंड।इसी तरह अपग्रेड एमएम सारँग गन और उसके बेरल का अलग-अलग चार-चार बार फायर कर परीक्षण किया गया जो कि पूरी तरह से सफल रहा है।

देश की पहली स्वदेशी 155 mm की धनुष तोप दूसरी तोपो की तुलना में काफी बेहतर है इसको सारंग से भी आधुनिक बताया जा रहा है।धनुष तोप का कंप्यूटर सिस्टम दुश्मन पर निशाना साधने में मदद करता है तथा इसका निशाना भी काफी सटीक होता है। सेना के पास अब तक आधा दर्जन धनुष तोप पहुंच चुकी है और दूसरी खेप जल्द ही भिजवाने की तैयारी की जा रही है।3 साल में अभी तक कुल 114 धनुष तोपों का निर्माण किया गया है।वही बात करें अगर सारंग गन की तो उसका पहला परीक्षण 21 जनवरी को किया गया था उसके बाद ही सारंग गन को लखनऊ में आयोजित डिफेंस एक्सपो में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को सौंपा गया था। सेना के पास अब आठ सारंग गन है। दूसरी खेप भी मार्च माह के अंत तक करीब एक दर्जन सारंग की जानी है। सारंग मूल रूप से रूस की 130 mm की गन है जिसे की भारत मे 155 mm में अपग्रेड किया गया है।

अब हम आपको दोनों ही तोपों की खूबियां भी बताते हैं……
अभी तक 114 धनुष तोप बनी है। यह देश की पहली सबसे बड़ी तोप है जिसकी फायरिंग रेंज 40 किलोमीटर की है।इस तोप से रात को भी फायरिंग संभव है।इसे ट्रक में पीछे बांधकर लाया ले जाया जा सकता है इसके साथ ही इसका निशाना भी बहुत सटीक है जो कि आधुनिक उपकरणों से लैस है। वही बात करें अगर सारंग गन की तो अभी तक 300 गन अपग्रेड हो चुकी हैं। सारंग गन वजन में भी काफी हल्की है जिसे कि ट्रक में आराम से लोड भी किया जा सकता है।इस गन की फायरिंग रेंज 39 किलोमीटर तक की है जिससे कि रात को भी निशाना लगाया जा सकता है नाइट विजन डिवाइस की मदद से। इस गन में 125 mm के बम को इस्तेमाल किया जाता है।

आज के परीक्षण के समय लेफ्टिनेंट जनरल संजय चौहान पूरे समय मौजूद रहे।धनुष और सारँग के सफल परीक्षण के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए संजय चौहान ने कहा कि आज एलपीआर रेंज और डी. जी.क्यू के लिए बहुत ही बड़ा और महत्वपूर्ण दिन है क्योंकि पहली बार यह देखा गया कि जो रेंज मीडियम गनो के परीक्षण हेतु तैयार नहीं थी वहाँ पर आज इन गनो का परीक्षण किया गया। है। लेफ्टिनेंट जनरल ने बताया कि एलपीआर रेंज में बड़ी गनो की टेस्टिंग होने से न सिर्फ करोड़ों रुपए का खर्चा बचेगा बल्कि टाइम भी बहुत बचेगा।उन्होंने कहा कि जो गन जबलपुर में बने उनका फायरिंग टेस्ट यही हो जाता है तो बिना वक्त जायर किये कम खर्च में इन गनो को हम सेना को सौप देंगे।

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