जबलपुरी मटर की न टैगिंग, और न ही किसानों को मिल रहा उचित दाम, कैसी व्यवस्था?

व्यापारी बाहरी राज्यों में 100 से 120 रुपए किलो के दाम पर बेचा जा रहा है।

जबलपुर,संदीप कुमार। आत्म निर्भर मध्यप्रदेश के तहत एक जिला एक उत्पाद योजना के अंतर्गत जबलपुर जिले का चयन किया गया था और इस योजना के तहत जबलपुर के हरे मटर की टैगिंग के साथ उसकी ब्रांडिंग भी की जानी थी लेकिन अधिकारियों की लापरवाही से ऐसा नहीं हो रहा बल्कि उसका उल्टा क्षेत्र में मटर उत्पादक किसानों को उसका उचित दाम तक नहीं मिल रहा है जिससे वहां के किसान काफी परेशान हैं।

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हम आपको बता दें कि मध्यप्रदेश में जिलास्तरीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने सरकार ने एक जिला एक उत्पाद नाम से एक नई योजना शुरु की थी जिसके तहत हर जिले की खासियत वाले उत्पाद की मार्केटिंग और ब्रांडिंग की जानी थी ताकि इसका फायदा उसके उत्पादन से जुड़े हर वर्ग को मिले और जिले के साथ प्रदेश का भी नाम रौशन हो।

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गौरतलब है कि देशभर में जबलपुर के हरे मटर की अच्छी खासी डिमांड है लेकिन सरकार की मंशा पर जिला प्रशासन ने हरे मटर की ब्रांडिंग का ऐलान किया था इसके लिए मंडियों में मटर के हर बारदाने पर जबलपुर मटर का मार्का लगाकर इसके लोगो की टैगिंग की जानी थी, अपनी इस कवायद का ऐलान करके जिला प्रशासन के अधिकारियों ने वाहवाही तो खूब लूटी लेकिन अब दावे से उलट दिखाई पड़ रहा हैं, जबलपुर की कृषि उपज मंडी में ना तो जबलपुरी मटर की टैगिंग की जा रही है और ना ही किसानों को मटर का उचित दाम मिल रहा है, किसान इस बात से मायूस हैं कि व्यापारी उनसे बीस-बाईस रुपए के दाम पर जो मटर खरीद रहे हैं उसे बाहरी राज्यों में 100 से 120 रुपए किलो के दाम पर बेचा जा रहा है।

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इधर दाम को बाजार के हवाले बताकर व्यापारी खुद कुबूल कर रहे हैं कि वो मटर के बारदानों में जबलपुर मटर का मार्का नहीं लगा रहे क्योंकि ये योजना अब तक मंडी में लागू हुई ही नहीं है, इधर जबलपुर जिला प्रशासन एक जिला एक उत्पाद योजना के तहत शहर में 24 से 28 दिसंबर तक मटर महोत्सव का आयोजन कर रहा है ताकि जबलपुरी मटर की ब्रांडिंग की जा सके लेकिन इधर जबलपुर की मंडियों से बाहरी राज्यों में भेजे जा रहे मटर में मार्का गायब होने पर कलेक्टर अब इसमें जागरुकता की जरुरत बताने लगे हैं।