ढाई साल की मासूम के दिल में लगाया पेसमेकर, डॉक्टरों ने दी नई जिंदगी

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जबलपुर|

 जबलपुर में युवा डाॅक्टरों ने एक ढ़ाई साल की बच्ची के दिल में पेस मेकर लगाकर उसे नया जीवन दिया है, आमतौर पर बच्चों को बाहर से पेसमेकर लगाया जाता है लेकिन पीडियाट्रिक काॅर्डियोलाॅजिस्ट डाॅ. के. एल. उमामहेश्वर, न्यूरोसर्जन डाॅ. यतिन खेर और एनेस्थेटिक डाॅ. आर. मिश्र ने बच्ची के दिल में 5×5 स्क्वेयर सेंटीमीटर का पेसमेकर लगाकर सफल आॅपरेशन किया है। डाॅक्टरों का कहना है कि इससे न सिर्फ बच्ची का जीवन सामान्य हो सकेगा बल्कि पेसमेकर की बैटरी की लाइफ भी बढ़ सकेगी।यह प्रयास अनूठा इसलिए है क्योंकी, ढाई साल की बच्ची का ह्रदय आकर काफी छोटा होने के कारण पेस-मेकर ह्रदय के ऊपर लगाया जाता है|

डॉक्टरों ने बताया की, इस प्रक्रिया में पेस-मेकर ह्रदय के ऊपर लगाया जाता है, जिस कारण हार्ट-रेट बनाये रखने के लिए उसे ज्यादा ऊर्जा की जरुरत पड़ती है. इसमें पेस-मेकर बैटरी की लाइफ काम होती है, जिस वजह से मरीज को हर तीन-चार साल में नई बैटरी डलवानी पड़ती है। इस नए प्रयास में इन् दोनों समस्याओं को हल करने का प्रयत्न किया है। पेस-मेकर ह्रदय के अंदर होने के कारण ऊर्जा का कम उपयोग होगा, और बैटरी लाइफ बढ़ कर दस साल की हो सकती है. और पेस-मेकर ह्रदय के अंदर होने की वजह से मरीज को फिर कोई ऑपरेशन की जरूरत नहीं पड़ती। पेस-मेकर मशीन बच्ची के दिल के अंदर लगाकर, उसकी कॉर्ड में एक लूप छोड़ा है, जिससे उम्र के साथ ह्रदय विक्सित होने पर भी कॉर्ड नहीं टूटता, डॉ के एल उमामहेश्वर, इंटरवेंशनल एवं पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट ने बताया कि यह ह्रदय रोग हर 22000 बच्चों में एक को होती है, और ऐसा प्रयास भारत में बहुत काम हुआ है. विश्व भर में भी कुछ 300 ऑपरेशन में इस प्रक्रिया का इस्तेमाल हुआ है। ढाई साल की वंशिका खत्री के पिता को इस बीमारी के बारे में 2 महीने पहले पता चला इलाज का खर्च ढाइे से तीन लाख होने के कारण, वे इलाज नहीं करवा पा रहे थे जब यह केस मेडीहेल्थ क्लीनिक के डॉक्टरों के पास आया, तब सोच-विचार कर डॉक्टरों ने बच्ची का इलाज बिना किसी शुल्क के करने का इरादा किया फिलहाल बच्ची स्वस्थ है और उसके परिजन भी बच्ची के इलाज से संतुष्ट हैं।