गंदगी और असुरक्षा के बीच फंसी करोड़ों की योजना, नर्मदा ओपन थिएटर पर कई सवाल उठे

जबलपुर,संदीप कुमार

नर्मदा नदी से लगे विसर्जन कुंड को नगर निगम नया रूप देने की तैयारी में जुटा हुआ है। स्मार्ट सिटी इस विसर्जन कुंड में ओपन थिएटर बना रहा है, जिसके लिए करीब 12 करोड़ रुपए नगर निगम खर्च करेगा। इस विसर्जन कुंड को धौलपुरी वाले लाल पत्थरों से सजाया जा रहा है जिसमें करोड़ों रुपए की लागत से कीमती पौधे इस कुंड के आस पास लगाए जा रहे हैं।

यहां पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए खुला क्षेत्र भी विकसित किया जाएगा, लेकिन इस ओपन थिएटर में गंदगी और सुरक्षा के लिए कोई भी इंतजाम नहीं किए गए हैं। नतीजन स्मार्ट सिटी के 12 करोड़ रुपए पूरी तरह से पानी में मिलने को तैयार हैं। अब इसे धांधली कहे या लापरवाही, लेकिन पैसों की बर्बादी जरुर हो रही है। जबलपुर स्मार्ट सिटी जिस मकसद को ध्यान में रखकर नर्मदा विसर्जन कुंड के बहाने 12 करोड़ रुपए खर्च करने जा रहा है, उसका उद्देश्य कामयाब होता नहीं दिखाई दे रहा है। करोड़ों रुपए की लागत से बनाए जा रहे इस पार्क में आम जनों के लिए पहुंचने और सुकून का समय बिताने जैसा वातावरण नहीं है। पार्क के चारों तरफ अवैध बस्ती बसी हुई है, इतना ही नहीं यहां पर अतिक्रमण का जाल इतना फैला हुआ है कि पार्क में आने-जाने वाले पर्यटक अपने आप को सुरक्षित महसूस करते हुए यहां रुक पाएंगे ये कहना मुश्किल है।

पार्क के पास बनी बस्ती की गंदगी पार्क में समा रही है, अगर इसी प्रकार से पार्क में आगे भी गंदगी होती रही तो उस गंदगी के कारण पर्यटक पार्क में ठहर नहीं पाएंगे. यही वजह है कि स्मार्ट सिटी का 12 करोड़ रुपए पूरी तरह से बर्बाद होने की कगार पर है. स्थानीय लोगों का कहना है कि स्मार्ट सिटी के अधिकारी बिना किसी तैयारी के विसर्जन कुंड में 12 करोड़ रुपए खर्च कर रहे हैं. इस पार्क के आसपास अवैध बस्ती है, जहां पर असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है. स्थानीय लोगों ने कहा कि रात होते ही ये विसर्जन कुंड शराब पीने वालों का ओपर बार बन जाता है. जिसके चलते पर्यटक हमेशा यहां पर अपने आप को असुरक्षित महसूस करते हैं।

नर्मदा ओपन एयर थिएटर में वह आधुनिक सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं, जिन्हें देखने के लिए ज्यादा से ज्यादा पर्यटक भटोली कुंड और यहां के पार्क में पहुंचकर मनोरंजन कर सकेंगे। वहीं यहां छोटे-मोटे कार्यक्रम भी होते रहेंगे। लेकिन इस पार्क में ऐसा कुछ नहीं देखा जा रहा है, यहां सीधे मोटे पाइप के जरिए बस्ती की गंदगी पहुंच रही है, उससे लोग अपना कार्यक्रम कर पाएंगे या फिर दुर्गंध के बीच में पार्क में समय व्यतीत कर पाएंगे ये कहना काफी मुश्किल है।