रिश्वत लेते रंगेहाथों धराया पुलिस आरक्षक, रुपए लेते ही लाल हो गए हाथ

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जबलपुर| लोकायुक्त जबलपुर की टीम ने सोमवार को सिहोरा एसडीओपी कार्यालय में पदस्थ एक आरक्षक को दस हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों कार्यालय में दबोच लिया। आरक्षक एक युवक द्वारा पिता के साथ ही फर्जी मारपीट के मामले को निपटाने की एवज में रिश्वत की मांग कर रहा था। रिश्वत की तीसरी किस्त पीड़ित द्वारा जैसे ही आरक्षक को दी गई वैसे ही लोकायुक्त पुलिस में उसे दबोच लिया। रिश्वत की रकम जप्त करने के बाद लोकायुक्त की टीम ने जैसे ही हाथ धुलाते ही लाल रंग निकलने लगा। 

लोकायुक्त डीएसपी दिलीप झरवड़े ने बताया कि वार्ड नंबर 12 खितौला शांति नगर निवासी प्रदीप पांडे(50) ने शुक्रवार को  शिकायत की थी की उनके छोटे भाई  प्रवीण पांडे ने पिता गोविंद प्रसाद पांडे के साथ फर्जी मारपीट के एक मामले की शिकायत एसडीओपी कार्यालय सिहोरा में 26 मार्च की थी। मारपीट के मामले की जांच की जा रही थी। जांच के दौरान एसडीओपी कार्यालय में पदस्थ आरक्षक अनुकूल मिश्रा ने मामला निपटाने के साथ उसके छोटे भाई के खिलाफ 420 का मामला दर्ज करने की एवज में रिश्वत की मांग की। रिश्वत न देने पर उल्टा उसी के खिलाफ 107,16 का प्रकरण दर्ज करने की धमकी देने लगा। परेशान होकर प्रदीप ने 7 मई को पहले 5 हजार और फिर 3 हज़ार रुपए दिए। बाद में आरक्षक ने पांच हजार रुपयों की और मांग की। प्रवीण ने जैसे-तैसे पांच हजार रुपये आरक्षक को दे दिए। 

दबाव डालकर मांग रहा था दस हजार रुपए और : 12 हजार रुपया देने के बावजूद आरक्षक प्रदीप को लगातार धमकाते हुए दस हजार की और मांग करने लगा। आखिरकार परेशान होकर प्रदीप ने शुक्रवार को जबलपुर लोकायुक्त कार्यालय में मामले की शिकायत की। शिकायत के आधार पर टीम ने आरक्षक द्वारा पैसों की मोबाइल रिकॉर्डिंग सुनी। लोकायुक्त टीम ने रिश्वत की चौथी किस्त के दो-दो हज़ार के चार नोट और पांच-पांच सौ के चार नोट में पाउडर लगाकर प्रदीप को दे दिए। दोपहर करीब तीन बजे के लगभग प्रदीप सिहोरा एसडीओपी कार्यालय पहुंचा। प्रदीप ने जैसे ही नोट आरक्षक अनुकूल मिश्रा को दिए। उसी समय लोकायुक्त टीम टीआई मंजू किरण तिर्की, एसआई नरेश बहरा, जुबेद खान, आरक्षक राकेश विश्वकर्मा, अमित गांवड़े आरक्षक अनुकूल मिश्रा को दबोच लिया। लोकायुक्त पुलिस में आरक्षण के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम 1988 की धारा 7 (1) डी के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

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