कोरोना वायरस ने छीनी बहनों की खुशी, नहीं बांधने दी भाईयों की कलाई पर राखी

जबलपुर, संदीप कुमार

करोना वायरस संक्रमण जेलों के अंदर ना फैले इसके लिए बीते मार्च माह से ही जेल प्रबंधन ने बंदियों से मुलाकात करने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। यह प्रतिबंध अभी भी जारी है और सोमवार को रक्षाबंधन के दिन भी इस प्रतिबंध का पालन किया गया।  अपने भाइयों को राखी बांधने के लिए आई हुई बहनों को जेल गेट पर ही राखी जमा करने के निर्देश दिए गए।

इस दौरान जेल कर्मियों ने बहनों के द्वारा लाई गई राखी को एक लिफाफे में रखा और उस पर बंदी भाई का नाम और क्रमांक दर्ज किया और इन राखियों को जमा कर लिया। बाद में इन सभी राखियों को जेल के अंदर सजा काट रहे बंदी भाइयों के पास तक पहुंचा दिया गया।

इस तरह से जेल प्रबंधन ने रक्षाबंधन के पवित्र पर्व की परंपरा को टूटने नहीं दिया, लेकिन बहनों को अफसोस इस बात का था कि प्रतिवर्ष वे अपने बंदी भाइयों से इस पर्व के बहाने मुलाकात कर लेती थी लेकिन इस बार मुलाकात संभव नहीं हो पाई है। हालांकि जेल प्रबंधन के द्वारा किए गए इस इंतजाम का सभी ने स्वागत किया लेकिन भाइयों से ना मिलने का मलाल बहनों के चेहरों पर साफ नजर आ रहा था।

सेंट्रल जेल तक आई बहनों का कहना था की कोरोना वायरस से बचने के लिए किए गए इस उपाय से काफी लाभ तो होगा, लेकिन अपने भाइयों से ना मिलने का उन्हें अफसोस है। क्योंकि मार्च के महीने के बाद से ही जेलों में बंदियों के परिजनों से मुलाकात का प्रावधान नहीं है। इस वजह से बहने मायूस नजर आयी.

कोरोना वायरस ने छीनी बहनों की खुशी, नहीं बांधने दी भाईयों की कलाई पर राखी