रानी दुर्गावती यूनिवर्सिटी के छात्र ने घास से बनाई बिजली, प्रोजेक्ट को पेटेंट कराने हो रही तैयारी

जबलपुर।  हर इंसान की जिंदगी में रोटी कपड़ा मकान के साथ-साथ बिजली भी अहम हिस्सा बन चुकी है। बिजली के उत्पादन को बढ़ाने के लिए सरकारें भी लगातार कोशिश कर रही हैं। आमतौर पर बिजली कंपनियों में कोयले से बिजली का उत्पादन किया जा रहा है कई बड़े-बड़े बांधों में पानी से भी बिजली बनाई जाती है। लेकिन क्या घास से भी बिजली बन सकती है सुनने में जरूर आपको अचम्भा होगा पर ये कारनामा किया है रानी दुर्गावती विश्विद्यालय के डीआईसीके छात्र अतीक ने। एक छोटी से बैटरी लगाकर उसका कनेक्शन कई बल्बों से किया गया। इसके बाद अतीक ने जैसे ही स्विच ऑन किया लाइट जल गई। ये बिजली आई है घास से। 

दरअसल, इस पूरे सिस्टम में घास ही सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। घास से ही यह बैटरी चार्ज हो रही है और उसके बाद इस बैटरी से बल्ब जलाए जा रहे है। अब आप यह सोच रहे होंगे कि आखिरकार यह कैसे संभव है, बिल्कुल यह संभव है। जबलपुर की रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में संचालित होने वाले डिजाइन इनोवेशन सेंटर में डीआईसी में कई प्रोजेक्टों पर काम चल रहा है। जिनमें से एक बिजली उत्पादन भी है। डीआईसी में बिजली उत्पादन प्रोजेक्ट पर काम करने वाले अतीक ने घास से बिजली बनाने वाले प्रोजेक्ट पर सफलता हासिल कर ली है।

छात्र की माने तो बिजली का उत्पादन आने वाले भविष्य में इंसान के लिए एक बड़ी चुनौती होगा। इस चुनौती को बहुत हद तक कम करने का काम ये घास करेगी। अतीक का कहना है कि घास की जड़ों में पाए जाने वाले बैक्टीरिया इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन का काम करते हैं इस इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन पर ही बिजली बनाई जा सकती है बस इन्हें आपस में मिलाने की जरूरत है। डीआईसी में तैयार हुआ यह प्रोजेक्ट अभी लैब स्टेज पर है लेकिन लैब स्टेज पर भी इस प्रोजेक्ट में पूरी तरीके से सफलता हासिल हो चुकी है। अब इस प्रोजेक्ट को पेटेंट कराने की तैयारी की जा रही है। इस लिहाज से इस प्रोजेक्ट से जुड़ी कुछ गोपीनय जानकारी भी है। जिसे सार्वजनिक नहीं की जा सकता। डीआईसी के संचालक डॉक्टर सार्दुल सिंह संधू बताते हैं कि घास सबसे ज्यादा पावरफुल वनस्पति है इस लिहाज से उन्होंने अपने प्रयोग में पहली घास का इस्तेमाल किया है लेकिन यह भी संभव है कि प्रकृति में पाए जाने वाले दूसरी वनस्पति भी बिजली उत्पादन में सहायक हो सकती है।