रेपिस्ट का ‘भैया जी इज बैक’ से WELCOME करना पड़ा भारी, सुप्रीम कोर्ट ने जमानत की रद्द

ABVP के भूतपूर्व छात्र नेता शुभांग गोटिया को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से मिली जमानत को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द करते हुए 7 दिन के अंदर सरेंडर करने के आदेश दिए है, दरअसल हाईकोर्ट से जमानत पर निकले शुभांग ने पूरे शहर में 'भैया इज बैक' के पोस्टर लगाए थे।

जबलपुर, डेस्क रिपोर्ट। रेप के आरोप में गिरफ्तार एबीवीपी के भूतपूर्व छात्र नेता शुभांग गोटिया को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से मिली जमानत को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है और 7 दिन के अंदर शुभम गोटिया को सरेंडर करने के आदेश दिए है, शुभांग पर उसके साथ पढ़ने वाली छात्रा ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था, छात्रा जब गर्भवती हो गई तो शुभांग और उसके परिवार ने मिलकर युवती का गर्भपात करवा दिया।

इस मामले में युवती ने जबलपुर के महिला थाने में शुभांग के खिलाफ मामला दर्ज करवाया था, जिसके बाद  पुलिस ने शुभांग को गिरफ्तार कर लिया था, मामलें में सुनवाई के दौरान मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने शुभांग को जमानत दे दी लेकिन  रिहाई के बाद छात्र नेता के समर्थकों ने पूरे शहर में भैया इज बैक जैसे पोस्टर्स छात्र नेता के स्वागत में लगाए थे, जिसे आधार बनाकर पीड़ित छात्रा ने सुप्रीम कोर्ट में छात्र नेता की जमानत रद्द करने की याचिका दायर की थी।

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मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में में रेप के आरोपी ABVP के पूर्व महानगर मंत्री शुभांग गोटिया की जमानत सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त कर दी। CJI एनवी रमन्ना, जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस हिमा कोहली की बेंच ने गोटिया को एक सप्ताह के अंदर सरेंडर करने का आदेश दिया है। इससे पहले हाईकोर्ट से जमानत मंजूर होने पर शुभांग गोटिया ने नर्मदा जयंती के अवसर पर शहर भर में ‘भैया इज बैक’ बैनर लगाए थे। इसे आधार बनाकर पीड़िता की ओर से याचिका दायर कर जमानत निरस्त करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई थी।

शुभांग गोटिया पर साथ में ही पढ़ने वाली 23 साल की छात्रा से रेप का आरोप है। लड़की के गर्भवती होने के बाद शुभांग और उसके परिवार ने लड़की का गर्भपात करवाया और फिर किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी, हालांकि इस बीच लड़की के घरवालों को इस बात की जानकारी लगी और वह शुभांग के परिजनों से मिलने पहुंचे और शादी की बात की लेकिन शुभांग के घरवालों ने लड़की के परिजनों को बेइज्जत कर घर से निकाल दिया, इसके बाद लड़की ने जून 2021 में महिला थाने में शिकायत की, जिसके बाद शुभांग फरार हो गया, पुलिस ने उस पर 5 हजार का इनाम भी घोषित किया, हालांकि बाद में शुभांग ने थाने में सरेंडर कर दिया। इस मामलें में शुभांग को नवंबर 2021 में जबलपुर हाईकोर्ट से जमानत मिली। हाईकोर्ट से जमानत मंजूर होने पर शुभांग गोटिया ने नर्मदा जयंती के अवसर पर शहर भर में ‘भैया इज बैक’ बैनर लगाए थे। इसे ही आधार बनाकर पीड़िता की ओर से याचिका दायर कर जमानत निरस्त करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई थी।

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पोस्टर को लेकर युवती ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने शुभांग गोटिया को नोटिस जारी कर पूछा था कि क्यों न जमानत निरस्त कर दी जाए। तब कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी में पूछा था कि ये ‘भैया इज बैक’ बैनर क्यों हैं? क्या आप जश्न मना रहे हैं? CJI एनवी रमन्ना ने आरोपी के वकील से कहा- ये ‘भैया इज बैक क्या है? अपने भैया को कहिए कि एक हफ्ता सावधान रहें। मामले में मप्र सरकार से भी जवाब मांगा था।

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भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमन्ना, न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी और न्यायमूर्ति हेमा कोहली की पीठ ने कहा कि पोस्टरों पर कैप्शन के साथ-साथ मुकुट और दिल के इमोजी है। इनका उपयोग समाज में अभियुक्तों द्वारा संचालित शक्ति का संकेत देता है। ये डर पैदा करता है। शिकायतकर्ता ने कहा कि उसे निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिलेगी।अदालत ने कहा कि ‘सोशल मीडिया पर उनकी की तस्वीरों के साथ टैग किए गए कैप्शन, समाज में रेप के आरोपी और उसके परिवार की शक्ति का शिकायतकर्ता पर हानिकारक प्रभाव को उजागर करते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ‘गंभीर अपराध के लिए हिरासत में लिए जाने के दो महीने से भी कम समय में रिहा होने पर आरोपी और उसके समर्थकों के जश्न के मूड को बढ़ाते हैं। कम से कम 10 साल की सजा का प्रावधान है, जो आजीवन भी हो सकता है। इस तरह के बेशर्म आचरण ने शिकायतकर्ता के मन में डर पैदा कर दिया है। उसे लगता है कि निष्पक्ष सुनवाई नहीं होगी। गवाहों को प्रभावित करने की संभावना है। शीर्ष अदालत ने कहा कि नीचे की अदालत द्वारा दी गई जमानत को रद्द करने के लिए हाईकोर्ट को विचार करना चाहिए कि क्या कोई पर्यवेक्षण की स्थिति उत्पन्न हुई है।