महाकौशल को साधने संघ ने डाला डेरा, RSS प्रमुख मोहन भागवत ने की बैठक

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भोपाल/जबलपुर। 

लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को जीत दिलाने के लिए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) ने कमर कसली है। मालवा के बाद अब संघ प्रमुख मोहन भागवत महाकौशल को तीन दिवसीय प्रवास पर है। वह यहां महाकौशल और छग प्रांत के संघ कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर रहे हैं। उन्होंने संघ कार्यकर्तओं को सरकार की सभी योजनाओं का प्रचार करने और बीजेपी के पक्ष में माहौल तैयार करने के लिए जिम्मेदारी दी है। 

दरअसल, माहकौशल संघ का गढ़ माना जाता है। लेकिन विधानसभा चुनाव में यहां कांग्रेस कुछ हद तक सेंध लगाने में कामयाब हुई है। महाकौश की कुल 38 सीटों में से भाजपा के खाते में मात्र 13 सीटें आयी हैं। बढ़त के साथ कांग्रेस ने 24 सीटों पर कब्जा जमाया है। 1 सीट पर निर्दलीय परचम लहराया है। पिछली बार करीब 24 सीटें भाजपा के कब्जे में थीं। संघ के गढ़ में कांग्रेस की इस सेंधामारी से आरएसएस चिंतित है। वह लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को पछाड़ने के लिए नई रणनीति पर काम कर रही है। 

बैठकों की गोपनीयता पर पूछे गए सवाल पर संघ पदाधिकारियों का कहना है कि संघ चालक की बैठकों में किसी तरह का कोई राजनैतिक एजेंडा नहीं है,और न ही संघ के काम में राजनैतिक एजेंडा कभी होता है। संघ 1925 से काम कर रहा है देश में, लेकिन जैसी बातें बाहर होती हैं, वैसी बाते या एजेंडा होता नहीं है। संघ की पूरे देश में 50 हजार शाखाये संचालित हो रही हैं, लगभग दो लाख सेवा के काम संघ देश में कर रहा है। संघ के पास की राजनैतिक एजेंडा दूर दूर तक नहीं है। संघ पदाधिकारियों के मुताबिक जो बातें मीडिया में राजनैतिक एजेंडे को लेकर आती हैं उसमे कोई सत्यता नहीं है।

संघ पदाधिकारियों की माने तो विद्या भारती में आयोजित इस बैठक में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने संघ के कार्य विस्तार पर महाकौशल और छत्तीसगढ़ प्रांत के स्वयं सेवकों और पदाधिकारियों से चर्चा कर संघ के नियमित होने वाले कामकाज की जानकारी ली है। दोनों प्रांत के स्वयं सेवकों और पदाधिकारियों को मार्गदर्शन भी दिया। संघ के प्रांतीय कार्यालय केशव कुटी और समन्वय सेवा केन्द्र में आयोजित हुई बैठकों की तरह, विद्या भारती में आयोजित हुई मोहन भागवत की इस बैठक को गोपनीय रखा गया। आलम ये था कि विद्या भारती के मुख्य दरवाज़े से आगे जाने की अनुमति स्वयं सेवको के अलावा किसी और व्यक्ति को नहीं दी गई। विद्या भारती में जैमर भी लगा दिया गया था ।