Jabalpur News: आज सुभाष चंद्र बोस की 125 वीं जयंती बनाई गई, केरल के राज्यपाल सहित केंद्रीय मंत्री प्रहलाद भी रहे कार्यक्रम में शामिल

नेताजी सुभाष चंद्र बोस(Subhash Chandra Bose) की आज 125 वीं जयंती(birth Anniversary) बनाई गई। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन राज्य मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि सुभाष चंद्र बोस पर जो इतिहास(History) लिखा गया है, उसमें पूरी जानकारियां नहीं है वो अधूरी है।

जबलपुर,संदीप कुमार। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आज 125 वीं जयंती बनाई गई। इस मौके पर सुभाष चंद्र बोस राष्ट्रवाद एवं युवा सरकार राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में केरल के राज्यपाल(Governor) आरिफ मोहम्मद खान और केंद्रीय संस्कृति व पर्यटन मंत्री प्रहलाद पटेल भी शामिल हुए।

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देश के लिए सब कुछ न्योछावर कर दिया
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन राज्य मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि सुभाष चंद्र बोस पर जो इतिहास लिखा गया है, उसमें पूरी जानकारियां नहीं है वो अधूरी है। सुभाष चंद्र बोस के जीवन से जुड़े हुए कई पहलू लोगों को पता ही नहीं है। मसलन उन्होंने सुभाष चंद्र बोस के जीवन से जुड़े कुछ किस्से सुनाए। उन्होंने बताया कि सुभाष चंद्र बोस ने सिवनी की जेल में भी कुछ दिन काटे थे, यहां उनके परिवार के लोग भी पहुंचे थे। लेकिन, यह बात सुभाष चंद्र बोस के जीवन पर अध्ययन करने वाले लोगों को भी पता नहीं है। ऐसी ही कई कहानियां हैं जिनके बारे में इतिहास में नहीं लिखा गया है। प्रहलाद पटेल का कहना है सुभाष चंद्र बोस का जीवन त्याग की एक बड़ी कहानी है, देश के लिए इतना बड़ा त्याग किसी और ने नहीं किया सुभाष चंद्र बोस के पास एक सुखी जीवन जीने के लिए सब कुछ था। लेकिन, उन्होंने देश के लिए सब कुछ न्योछावर कर दिया।

महात्मा गांधी को करना पड़ा था हार का सामना-
आज के इस मौके पर जबलपुर के गोल बाजार में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जीवन से जुड़ी कई झलकियां भी पेश की गई। उनके जीवन से जुड़े हुए कई ऐसे चित्र जिनके बारे में लोगों को जानकारी नहीं है। उनका प्रदर्शन किया गया। वहीं एक 400 मीटर लंबी पेंटिंग भी बनाई गई , जिसमें सुभाष चंद्र बोस के जीवन से जुड़ी हुई कई बातों को उकेरा गया है। जबलपुर में यह आयोजन विशेष महत्व इसलिए भी रखता है, क्योंकि जबलपुर सुभाष चंद्र बोस के जीवन में एक महत्वपूर्ण योगदान रखता था। जबलपुर ही वह जगह थी ,जहां महात्मा गांधी को सुभाष चंद्र बोस की वजह से अपने जीवन की सबसे बड़ी राजनीतिक हार का सामना करना पड़ा था।