स्टेट बार काउंसिल के अध्यक्ष बने विजय चौधरी, वकीलों की समस्या के लिए सीएम और चीफ जस्टिस से मिलेंगे

जबलपुर, संदीप कुमार। अधिवक्ता विजय चौधरी को आज सर्वसम्मति से निर्विरोध स्टेट बार काउंसिल का अध्यक्ष चुना गया। इस दौरान बार में सभी सदस्य उपस्थित रहे। जैसे ही विजय चौधरी का नाम सामने रखा गया वैसे ही सभी लोगों ने एकमत होकर उनके अध्यक्ष होने पर मुहर लगा दी।

वकीलों की समस्या का निदान करना रहेगी पहली प्रथमिकता
स्टेट बार काउंसिल ऑफ का अध्यक्ष बनने के बाद मीडिया से बात करते हुए अधिवक्ता विजय चौधरी ने कहा कि उनका अध्यक्ष बनने के बाद सबसे पहले जो काम की प्राथमिकता रहेगी वह है वकीलों की समस्या का निदान करना। उन्होंने कहा कि वकीलों की समस्या के लिए जल्द ही स्टेट बार ऑफ़ काउंसिल की टीम मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और इस चीफ जस्टिस से मुलाकात कर वकीलों की समस्या उनके सामने रखेगी।

परेशान अधिवक्ताओं की समस्या के लिए बार कॉउंसिल देगा पाँच करोड़ रुपये
स्टेट बार काउंसिल के नवनिर्वाचित अध्यक्ष विजय चौधरी ने कहा कि निश्चित रूप से इस समय अधिवक्ता खासे परेशान हैं। लिहाजा इसको देखते हुए लॉ डिपार्टमेंट ने वकीलों की मदद के लिए दो करोड़ रुपये स्वीकृत किए। पर इस राशि को बढाकर पाँच करोड़ रुपये करने की स्टेट बार तैयारी कर रहा है जिससे कि प्रदेश के वकीलों की अर्थिक मदद हो सके।

कोरोना काल में सबसे ज्यादा परेशान अधिवक्ता
विजय चौधरी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि कोरोना काल में अगर सबसे ज्यादा कोई परेशान है तो वह अधिवक्ता हैं। इसकी वजह यह है कि एडवोकेट एक्ट में साफ तौर पर लिखा है कि वकील वकालत के अलावा कोई और व्यवसाय नही कर सकता। इसलिए पूरे देश में कोरोना काल के समय अगर सबसे ज्यादा किसी का नुकसान हुआ है तो वह है अधिवक्ता, जिसके लिए कोशिश की जाएगी कि स्टेट बार किसी तरह से कोरोना काल में परेशान हुए अधिवक्ताओं की मदद किसी न किसी रूप में करें।

एडवोकेट एक्ट में केंद्र का होता है दखल
वकीलों के लिए एडवोकेट एक्ट को लेकर लंबे समय से मांग उठ रही है, पर सरकार का इस ओर ध्यान नहीं है। अध्यक्ष विजय चौधरी ने कहा कि एडवोकेट एक्ट में केंद्र का दखल होता है और वर्तमान में भारत के कानून मंत्री जो है वह खुद एक वकील हैं। लिहाजा स्टेट बार की टीम जल्द ही एडवोकेट एक्ट लागू करने को लेकर केंद्रीय कानून मंत्री से मुलाकात भी करेगी, साथ ही कानून मंत्री से अनुरोध किया जाएगा कि एडवोकेट एक्ट के संशोधन के लिए संसद में इसकी चर्चा की जाए।

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