72 घंटों में कोरोना संक्रमित मरीजों की घर रवानगी कहीं खतरा ना लौटा दे : सुनील जैन

खंडवा। सुशील विधानी| कहने को तो खंडवा (Khandwa) में मेडिकल कॉलेज (Medical College) है, जहां डॉक्टरों की भारी भरकम फौज के साथ गगनचुंबी भवन और सैकड़ों लोगों का मेडिकल स्टॉफ है। जो कि महानगरों की तर्ज पर उपचार देने का दावा करते है। लेकिन कोरोना संकट (Corona Crisis) के बीच यहां सर्दी-खांसी के सामान्य मरीजों का भी यहां के डॉक्टर उपचार नहीं कर रहे हैं। एक ओर जहां कोरोना संक्रमित मरीज अपनी जान बचाने के लिए जिला चिकित्सालय के डॉक्टरों को भगवान समझकर उनकी शरण में है। लेकिन कोविड सेंटर में अव्यवस्थाओं का आलम ये है कि उन्हें जो मूलभूत सुविधाएं मिलनी चाहिए वो नहीं मिल पा रही हैं। न तो खाने के लिए पौष्टिक भोजन मिल पा रहा है और न ही रहने और नहाने के लिए कोई उचित इंतजाम किया गया है। समाजसेवी एवं रोगी कल्याण समिति के पूर्व सदस्य सुनील जैन ने बताया कि सांसद नंदकुमारसिंह चौहान एवं जिले के विधायक द्वय ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से मरीजों की अच्छी सेवा के लिए मेडिकल कालेज का अनुरोध किया था जो प्रदेश के मुख्यमंत्री ने स्वीकृत किया और वह बनकर शुरू भी हो चुका है, लेकिन अव्यवस्थाओं के चलते मरीजों को व्यवस्थित लाभ नहीं मिल पा रहा है। जिला चिकित्सालय में व्याप्त अव्यवस्थाओं पर रोष व्यक्त करते हुए सुनील जैन कहा कि सबसे हैरान कर देने वाली बात ये है कि पानी भी नाप तौलकर दिया जा रहा है। ऐसा हम नहीं बल्कि ये बात आइसोलेशन वार्ड से डिस्चार्ज होकर लौट रहे मरीज कह रहे हैं। कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सरकार व स्वास्थ्य विभाग हर किसी को सोशल डिस्टेंसिंग रखने के साथ ही हाथ धोने व सैनिटाइजर का इस्तेमाल करने की सीख दे रहा है। लेकिन यहां अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में अव्यवस्था फैली हुई है। सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ रही हैं तो आइसोलेशन वार्ड में भर्ती होने वाले पूरे अस्पताल में घूम रहे हैं। पीने के लिए पानी तक नहीं है तो सफाई व्यवस्था भी नहीं है। हाथ धोने के लिए केवल एक साबुन रखा गया है।
मरीजों को नहीं दिया जा रहा पौष्टिक भोजन
कोरोना संक्रमण को लेकर जहां विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा विशेष सुरक्षा बरतते हुए दिशा-निर्देशों का पालन करने की बात कही गई। वहीं दूसरी ओर जिला चिकित्सालय के कोविड 19 वार्ड में भर्ती मरीजों को कोविड 19 की गाईडलाईन को दरकिनार करते हुए पौष्टिक भोजन भी उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। जिसकों लेकर यहां भर्ती मरीजों ने कई बार सोशल मीडिया पर वीडियों वायरल कर यहां व्याप्त अव्यवस्थाओं पर ध्यानाकर्षण भी करवाया लेकिन इसके बाद व्यवस्थाओं में कोई सुधार होता नहीं दिख रहा है। इसके विपरीत हालात यह है कि आईसोलेशन वार्ड में भर्ती मरीजों के परिजनों द्वारा जो भोजन अपने स्वजनों के लिए भेजा जाता है वह भी स्टॉफ द्वारा समय पर मरीजों को नहीं दिया जाता है। जिससे कोरोना संक्रमण से जूझ रहे मरीजों को भोजन और पानी के लिए भी आईसोलेशन वार्ड में परेशान होना पड़ रहा है।
डॉक्टरों की बीच चल रही नूराकुश्ती
कोरोना संकट के बीच जिला चिकित्सालय और मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों के बीच चल रही अहं की राजनीति थमने का नाम नहीं ले रही है। जिसका खामियाजा यहां आने वाले मरीजों को उठाना पड़ रहा है। जिला चिकित्सालय और मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों के बीच तालमेल के अभाव में नूराकुश्ती का खेल चल रहा है। डॉक्टरों में तालमेल के अभाव का ही परिणाम है कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए बनाए गए आईसोलेशन वार्ड से लगातार मरीजों द्वारा अव्यवस्था की शिकायतें की जा रही है।
सॉरी वार्ड से मरीजों ने बनाई दूरी
कोविड 19 संक्रमण के बीच संदिग्ध मरीजों के समय पर उपचार देने हेतु जिला चिकित्सालय में सॉरी वार्ड बनाया गया है। लेकिन हालात यह है कि इस वार्ड में 3-3 दिनों तक डॉक्टर ही नहीं आते, मरीजों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है। जहां मरीज डॉक्टरों की राह देखते-देखते ही बीमारी से चिंताग्रस्त हो रहे है। मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिलने से अब सॉरी वार्ड के हाल यह है कि यहां पर मरीज ही नहीं है और बेड खाली है।
यह होनी चाहिए व्यवस्था
नियमानुसार आईसोलेशन वार्ड में ऑक्सीजेशन सिलेंडर होना चाहिए, इमरजेंसी दवाइयां रखी जाना चाहिए। कार्डिएक मॉनिटर, पल्स ऑप्सीमीटर, वेंटिलेटर और इसे चलाने वाला भी चाहिए। बेड चकाचक होना चाहिए। इस पर साफ सुथरी चादर होना चाहिए। सामान्य मरीज को यहां 48 घंटे और संक्रमित मरीज को 14 दिन रखने का नियम है और दो रिपोर्ट नेगिटिव आने पर मरीज को डिस्चार्ज किया जाता है लेकिन वर्तमान में तीन से चार दिनों में पॉजिटिव मरीजों को बिना सैंपलिंग के छोड़ा जा रहा है जो शहर के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकता है। मरीजों को व्यवस्थित इलाज देने एवं उनको बचाने के लिए आवश्यकता है सुपर विजन की जो नये कलेक्टर से अपेक्षा है।