कबाड़ से बगीचे को बनाया सुंदर, अनुपयोगी हो चुके सामान से नवाचार का दिया संदेश

अनुपयोगी सामग्री (Waste Material) से रामेश्वर आम्रकुंज के समीप स्थित शास्त्री बगीचे का कायाकल्प किया गया है, जिसमें ऐसी सामग्री का उपयोग किया गया जो कबाड़ हो चुकी थी। बगीचे में कबाड़ सामग्री से बगीचे(Garden) को सुंदर व आकर्षक रूप दिया गया है।

खंडवा, सुशील विधाणी। स्वच्छता सर्वेक्षण के मद्देनजर रखते हुए नगर निगम के कर्मचारियों द्वारा किए गए नवाचार (Innovation) की खूब सराहना हो रही है। अनुपयोगी सामग्री से रामेश्वर आम्रकुंज के समीप स्थित शास्त्री बगीचे का कायाकल्प किया गया है, जिसमें ऐसी सामग्री का उपयोग किया गया जो कबाड़ हो चुकी थी। बगीचे में कबाड़ सामग्री से बगीचे को सुंदर व आकर्षक रूप दिया गया है। वहीं चित्रों व विभिन्न आकृतियों के माध्यम से नागरिकों को जागरूक करते हुए संदेश भी दिया जा रहा है। ताकि शहरवासी अपने घरों व आसपास इसी तरह अनुपयोगी(Waste) सामग्री का उपयोग कर सके। बगीचे के अंदर कुछ सेल्फी प्वाइंट(Selfie Point) भी बनाए गए है। जहां पर लोग आकर अपनी फोटो (Photo) खींचते है, यहां आने वाले बच्चों और युवाओं में खासा उत्साह है। आपको बगीचे में फर्नीचर, झूला और साज – सज्जा का जो भी सामान देखने को मिलेगा। वह कबाड़ की चीजों से यानी पुराने टायर, बेकार लोहा, प्लास्टिक व कॉंच की बोतलें, ड्रम आदि का इस्तेमाल कर बनाया गया है। अनुपयोगी हो चुकी वस्तुओं से भी नवाचार किया जा सकता है। सभी नागरिक स्वच्छता का ध्यान रखें और शहर को साफ-सुथरा एवं स्वच्छ बनाने में अपना योगदान दें।

कबाड़ से बगीचे को बनाया सुंदर, अनुपयोगी हो चुके सामान से नवाचार का दिया संदेश

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निगमकर्मियों की पहल की हो रही सराहना
जोन प्रभारी भुवन श्रीमाली ने बताया कि जोन क्रमांक 6 के अंतर्गत शास्त्री पार्क में कबाड़ से जुगाड़, बेस्ट से बेस्ट हेतु कार्य चल रहा है। यह शहर का प्रथम बगीचा है जिसमें उपयोग में लाए जा रहे मटेरियल को एकत्रित करने से लेकर कलाकृतियों के निर्माण तक सारा काम निगमकर्मियों द्वारा संचालित किया जा रहा है। इसमें भिन्न-भिन्न प्रकार की आकृतियां बनाई जा रही है। जिसमें मुख्यतः इतिहास, अध्यात्म, योग और प्रकृति को लेकर कार्य किया जा रहा है। यहां शिवजी की पिंडी, सूर्य नमस्कार के 12 आसन बनाए जा रहे हैं। पौधे लगाने के साथ ही ताजमहल लोटस टेंपल, इंडिया
गेट और कुतुब मीनार, बनाए गए हैं।

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कुतुबमीनार में बिसलेरी की बोतल और कप का उपयोग किया गया है। ताज महल पुराने थर्माकोल और नए थर्माकोल एवं कागज से बनाया गया है। इंडिया गेट पुरानी रद्दी कागजों से एवं सिंगल यूज प्लास्टिक के फूलों से बनाया गया है। लोटस टेंपल पुराने रद्दी कागजों से बनाया गया है। सांची स्तूप डिस्पोजल ग्लास से एवं सिंगल यूज पॉलिथीन से बनाया गया है। साथ ही पुरानी बिसलेरी बॉटल, उसे काटकर पौधे लगाए गए हैं एवं उनमें फूल सजाए गए हैं। पुराने मटको से डिजाइनिंग कर सुंदर बनाया गया है। पुरानी ट्यूबलाइट को सजाया गया है। जो टायर पुराने हैं उनसे हंस, चाय कप, हाथी कैटरपिल, एनाकोंडा, टेडी बेयर, सूरज आदि चीजें बन चुकी है। बगीचे में पहुंचने वाले लोग निगमकर्मियों की इस पहल की सराहना कर रहे हैं।

कबाड़ से बगीचे को बनाया सुंदर, अनुपयोगी हो चुके सामान से नवाचार का दिया संदेश

रेलगाड़ी, गुफा व झूले भी बनेंगे
जोन प्रभारी भुवन श्रीमाली ने बताया कि इस बगीचे जोन क्रमांक 6 के कार्यालय सहायक, नेमीचंद बोयत, कम्प्यूटर ऑपरेटर्स रवि खेरे, वार्ड प्रभारी जय खराले, भृत्य ज्योति तायड़े, डोर टू डोर सहायक संतोष इंगले एवं विनोद तायडे आदि के सहयोग से कार्य किया जा रहा है। जिसमें आगे हमारे द्वारा पुराने कंटेनर से रेलगाड़ी, गुफा, झूले आदि चीजें बनाई जाएगी। इसके अलावा अन्य प्रोजेक्ट पर भी तैयारियां चल रही है।

इन अनुपयोगी सामग्रियों का हुआ उपयोग
बगीचे के सौंदर्यीकरण में 500 डिस्पोजल ग्लास, 700 पानी की बोतलें, 300 कॉच की बोतलें, 25 ट्यूब लाईट, 40 टायर पुराने, मटके 17, 20 पुराने बास, पुरानी 5 केने बड़ी व 5 छोटी आदि चीजों का उपयोग किया गया है। अभी कार्य प्रारंभ है, आगे भी कई चीजों का निर्माण किया गया है।