खंडवा। सुशील विधानि। 

इंदौर के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक डॉ. वरूण कपूर ने खण्डवा के गौरीकुंज सभाकक्ष में स्कूली छात्र-छात्राओं को साईबर अपराध क्या है, और उससे कैसे बचा जा सकता है, इस संबंध में विस्तार से जानकारी दी। एडीजी डॉ. कपूर ने विद्यार्थियों से कहा कि हम जिस दुनिया में जी रहे है, यही हमारी वास्तविक दुनिया है और यह सबसे बेहतर है। जबकि हम किसी कम्प्यूटर यंत्र या नेटवर्क से जुड़कर सूचनाओं का आदान-प्रदान करते है वह हमारे ही द्वारा बनाई गई वर्चुअल दुनिया है। वर्चुअल दुनिया में ही साईबर क्राईम पनप रहे है। इन साईबर क्राईम से बचने का सबसे सुरक्षित उपाय है कि हम जागरूक रहे तथा सायबर क्राइम के बारे में जानकारी रखे। उन्होंने इस दौरान सभी को सलाह दी कि बिना सोचे समझे किसी अंजान व्यक्ति को अपने बारे में मोबाईल या कम्प्यूटर के माध्यम से जानकारी न दे। इस दौरान डीआईजी श्री एमएस वर्मा, कलेक्टर श्रीमती तन्वी सुन्द्रियाल, पुलिस अधीक्षक डॉ. शिवदयाल सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री प्रकाश परिहार सहित जिले के विभिन्न पुलिस अधिकारी व मीडिया प्रतिनिधि भी मौजूद थे।एडीजी डॉ. कपूर ने अपने संबोधन के दौरान मौजूद विद्यार्थियों से प्रश्न भी पूछे। प्रश्नों का सही जवाब देने वाले विद्यार्थियों को एडीजी डॉ. वरूण कपूर ने प्रमाण पत्र व गोल्डन बेज भी प्रदान किए। पुरस्कृत भी किया।

एडीजी डॉ. कपूर ने साईबर क्राईम से जुड़े सोशल मीडिया और अन्य सोशल नेटवर्किंग जानकारियों के बारे में विस्तार से कई मामलों के उदाहरण देते हुए बताया। उन्होंने न सिर्फ विद्यार्थियों को इस दौरान संबोधित किया, साथ ही उपस्थित विद्यार्थियों से सवाल-जवाब भी किए। एडीजी डॉ. कपूर ने कहा कि वर्तमान में स्मार्ट फोन समाज में तेजी से बढ़ रहे है, इसी कारण संदेशों के आदान प्रदान के लिए व्हॉट्सअप की उपयोगिता भी काफी तेजी से बढ़ रही है। डॉ. कपूर ने व्हॉट्सअप का उपयोग भी जरूरत के मुताबिक ही करने की बात कहीं। साथ ही उन्होंने साईबर अपराधों से बचने के उपाय भी बताए।

एडीजी डॉ. कपूर ने विद्यार्थियों से कहा कि आज का युग सूचना का युग है और यह सूचना हम स्वयं ही फोटो, वीडियों व टेक्स्ट के माध्यम से वर्चुअल दुनिया तक शेयरिंग, लाईक करके पहुंचाते है, जिसका उपयोग वर्चुअल जगत के अपराधी करते है। डॉ. कपूर ने डिजीटल फुट प्रिंट, साईबर स्टाकिंग, साईबर बुलिंग जैसे तकनीकी शब्दों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने साईबर अपराधों के बारे में बताते हुए बनाए गए आईटी एक्ट की धाराओं के बारे में भी बताया। एडीजी डॉ. कपूर ने स्टेट्स अपडेट न करने की सलाह भी दी और कहा कि टाईम और समय व स्थान का उल्लेख न करें।