आज से होलाष्टक प्रारंभ, 8 दिनों तक नही होंगे मांगलिक कार्य

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खंडवा। सुशील विधानी।

मंगलवार से होला अष्टक प्रारंभ हो गया है ,जिसके कराण पूरे आठ दिनों तक मांगलिक कार्यो पर विराम लग जायेगा साथ ही 15 ता. से खरमास शुरू होने पर 14 अप्रैल के बाद शुभ मांगलिक कार्य प्रारंभ होंगे, माँ शीतला संस्कृत पाठशाला के आचार्य पं अंकित मार्कण्डेय ने बताया कि मार्च में सिर्फ 2 दिन विवाह के मुहूर्त है
3 मार्च से होलाष्टक शुरू होने पर 10 मार्च तक कोई शुभ काम नहीं किया जा सकेगा।
फ़ाल्गुन शुक्ल अष्टमी से फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा तक यह आठ दिन होते हैं होला अष्टक के, इसके बाद 11 और 12 तारीख को विवाह और शुभ कामों के लिए मुहूर्त है। वहीं 15 मार्च से सूर्य मीन राशि में प्रवेश कर जाएगा। इसके बाद अगले महीने 14 अप्रैल तक खरमास हाेने के कारण किसी भी तरह के शुभ कामों के लिए मुहूर्त नहीं रहेगा। इसके बाद सूर्य के अपनी उच्च राशि में आ जाने पर शुभ काम शुरू हो जाएंगे

इसलिए माना जाता है अशुभ
पौराणिक कथा के अनुसार
भक्त प्रह्लाद की नारायण भक्ति से क्रोधित होकर हिरण्यकश्यप ने होली से पहले आठ दिनों में उन्हें कई तरह के कष्ट दिए थे। तभी से इन आठ दिनों को हिन्दू धर्म में अशुभ माना गया है। इन 8 दिनों में ग्रह अपना स्थान बदलते हैं। ग्रहों के बदलाव की वजह से होलाष्टक के दौरान कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता।

क्या ना करें
पं मार्कण्डेय जी के बताया कि इन दिनों में शुभ कार्य करने की मनाही होती है। इस समय में विवाह, गृह प्रवेश, निर्माण, मुण्डन,यग्योपवित संस्कार, नामकरण आदि शुभ कार्य वर्जित होते हैं। नए काम भी शुरू नहीं किए जाते हैं।

क्यों है मनाही
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इन दिनों में जो कार्य किए जाते हैं उनसे जीवन में कष्ट और पीड़ा आती है। इन दिनों में यदि विवाह आदि किए जाते हैं तो भविष्य में संबंध विच्छेद और कलह की संभावना ज्यादा रहती है।

शुभ मुहूर्त में करे पूजन…
आचार्य पं अंकित मार्कण्डेय जी ने बताया कि 9 मार्च को होलिका पूजन होगा। शाम 6.30 से 8.56 तक प्रदोष काल रहेगा जिसमें पूजन करना शुभ रहेगा। 10 मार्च को होली खेली जाएगी,

डर पर विजय…
होली पूजन से हर प्रकार के डर पर विजय प्राप्त होती है। इस पूजन से परिवार में सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है। मां पुत्र को बुरी बुरी शक्तियों से बचाने और मंगल कामना के लिए यह पूजा करती हैं।

होली पूजन
होली पूजन का तरीका
पूजन करते समय आपका मुंह पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ होना चाहिए। पहले जल की बूंदों का छिड़काव अपने आसपास, पूजा की थाली और खुद पर करें। इसके बाद नरसिंह भगवान का स्मरण करते हुए उन्हें रोली, मौली, अक्षत और पुष्प अर्पित करें। इसी प्रकार भक्त प्रह्लाद का स्मरण करते हुए उन्हें रोली, मौली, अक्षत और पुष्प अर्पित करें।

सुख-समृद्धि की कामना –
होलीका पर बताशे और फूल चढ़ाएं। कुछ लोग होलिका को हल्दी, मेहंदी, गुलाल और नारियल भी चढ़ाते हैं। हाथ जोड़कर होलिका से परिवार की सुख-समृद्धि के लिए कामना करें। सूत के धागे को होलिका के चारों ओर घुमाते हुए तीन, पांच या सात बार लपेटते हुए चक्कर लगाएं। जहां आपका अंतिम चक्कर पूरा हो, वहां जल का लोटा खाली कर दें।

होली के मंत्रों का जाप करे..
होली के दौरान कुछ मंत्रों का जप करने से आप महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। होली की रात देवी महालक्ष्मी सहित इष्ट देवी-देवताओं की विधिवत पूजा करनी चाहिए। मंत्र जप 108 बार या 1008 बार किया जा सकता है। मंत्र जप के लिए कमल के गट्टे की माला का उपयोग करना चाहिए। इस मंत्र का जप करें – मंत्र: 1. ऊँ श्रीं महालक्ष्म्यै नम:।

आचार्य पं अंकित मार्कण्डेय
माँ शीतला संस्कृत पाठशाला खण्डवा
8109203108

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