दिनदहाडे लालदास आश्रम पर बलपूर्वक कब्जा, वृद्ध साध्वी को डरा-धमका किया बाहर

खण्डवा। सुशील विधानी।

ओंकारेश्वर तीर्थनगरी में मंगलवार की दोपहर 2 बजे के लगभग राजस्थान,हरियाणा,महाराष्ट्र एवं मध्यप्रदेश के इन्दौर,महु,बडवाह शहरों के 50 से अधिक लोगों ने ब्रम्हपुरी में स्थित बाबा लालदास योगीराज आश्रम में अचानक धावा बोलकर आश्रम में अकेली रह रही 60 वर्षीय साध्वी मंगलादासी गुरु लालदास योगीराज को आश्रम से बाहर बलपुर्वक निकाला उसका मोबाईल छीन लिया तथा उससे अभद्र व्यवहार तथा गाली-गलौच करके 2 जेसीबी मशीन से आश्रम की यज्ञशाला,गौशाला,चार पहिंयावाहन गैरेज के सांथ लगभग 1 हजार पाँच सौ वर्गफीट में बने पक्के आरसीसी के निर्माण को बलपूर्वक तोडा गया यह कार्य 24 घटे बाद बुधवार शाम तक भी जारी है।पिडित साध्वी मंगलादासी ओंकारेश्वर पुलिस थाने पर गई लेकिन वहां पर भी किसी ने कोई सुनवाई नही करी।ओंकारेश्वर नगरी में फिल्मी स्टाईल में दल-बल के सांथ आतंक पूर्वक कब्जा लेने का यह अनूठा उदाहरण सामने देखने में आया हैं जब की यह मामला खण्डवा जिला सत्र न्यायालय में विचाराधीन हैं।

इस संबध में प्राप्त जानकारी के अनुसार ओंकारेश्वर के ब्रम्हपुरी क्षैत्र में पुनासा तहसील के मांधाता राजस्व सर्किल के वर्तमान पटवारी हल्का नम्बर 7 के गोदडपुरा क्षैत्र सर्वे क्रमांक 49 की 1.33 एकड जमीन जो लगभग 60 हजार वर्गफिट हैं। वर्ष 2005 में लालदास योगिराज गुरु कौशल किशोर दास ने खण्डवा के इंद्रजित जूनेजा से रजिस्टर पत्र के माध्यम से क्रय की थी इसके बाद 7 नवम्बर 2005 को लालदास योगिराज बाबा का निधन हो गया था।इस आश्रम की परंपरा अनुसार इसी भूमि पर लालदास बाबा की समाधी बनाई गई तथा उनकी मंगलादासी को चादर औढाकर इस आश्रम का मुख्य कर्ताधर्ता बनाया गया उस दौरान इस आश्रम में अजयदास भी रहता था जिसने स्वर्गीय लालदास से दिक्षा ग्रहण की थी।

मंगलादासी के वृद्ध एवं कम पढाई-लिखाई का लाभ ऊठाकर अजयदास ने साम-दाम-दण्ड-भेद लगाकर इस भूमि को अपने नाम षडयंत्र पुर्वक करवा लिया और इसके बाद 2 अलग-अलग बडी-बडी संस्थान जिसमे एक महाराष्ट्र का तथा दूसरा राजस्थान का दोनों को इस आश्रम की भूमि की सौदा चिट्ठी लिख दी थी।अजय दास द्वारा धोखाधड़ी किये जाने पर यह मामला एक संस्थान खण्डवा जिला सत्र न्यायालय में अजय दास के विरुद्ध लगाया तब कही जाकर अजय दास ने उस संस्थान से समझोता करके लगभग 2 करोड की धनराशी उस संस्थान को वापस लौटा दी जबकि दुसरे संस्थान की जो सौदा चिट्ठी अजय दास ने लिखकर दी थी उस संस्थान से भी ज्यादा रकम अजयदास ने लेकर यह रजिस्ट्री राजस्थान वाले संस्थान को कर दी थी।

रजिस्ट्री में लाखों रुपयों की स्टाम्प ड्यूटी की चोरी

उपरोक्त संबध में जानकार सूत्र बताते हैं की अजयदास ने राजस्थान राज्य के एक संस्थान के ट्रस्टी के नाम विक्रय पत्र रजिस्ट्री करके इस भूमि को मात्र 55 लाख रुपये में बेचना बताया गया हैं।जबकि खण्डवा रजिस्टार कार्यालय की गाईडलाईन के अनुसार इस भूमि का मूल्य करोड़ों रुपयों में आंका जा रहा हैं।
इसका सबसे बडा प्रमाण यह है की अजय दास ने महाराष्ट्र के जिस संस्थान को इस भूमि की सौदा चिट्ठी लिखी थी उसमें भी 1 करोड़ रुपये अग्रिम राशी (टोकन मनी) के रुप में ले लिये थे।जो उसने खण्डवा जिला सत्र न्यायालय में समझोता होने के बाद संबंधित पक्ष को वापस किये हैं।इस संबध में यह भी जानकारी मिली है की महाराष्ट्र के धार्मिक संस्थान को यह भूमि का सौदा 3 करोड़ 50 लाख रुपये में किया था इसके राजस्थान की धार्मिक संस्थान ने इस भूमि का मूल्य 4 करोड़ रुपये देकर अजय दास से इस भूमि की रजिस्ट्री करवा ली थी।महत्वपूर्ण तथ्य यह है की 4 करोड़ रुपये के मूल्य की इस जमीन को मात्र 55 लाख रुपयों में कर दी गई यह सर्वाधिक आश्चर्यजनक तथ्य अर्थात् रजिस्ट्री लगभग 7 गुना अधिक मुल्य लेकर इस भूमि की रजिस्ट्री की गई जिसमें सरकार एवं आयकर विभाग को लाखों रुपयों का राजस्व एवं आयकर का नुकसान पंहुचाया गया।

संपूर्ण मामले में पुलिस की भूमिका संदेहास्पद रही

लालदास योगिराज बाबा आश्रम की साध्वी मंगलादासी ने मंगलवार दोपहर 1 बजे ओंकारेश्वर पुलिस थाने जाकर स्वयं के उपर हमला होने तथा आश्रम पर कब्जा एवं तोडफोड करने संबंधी शिकायत करवाई थी लेकिन पुलिस ने साध्वी मंगलादासी को आदमचेक फाडकर दे दिया।दुसरी और जब आश्रम में तोडफोड चल रही थी तो ओंकारेश्वर थाना निरिक्षक द्वारा आश्रम के प्रवेश द्वार पर एक महिला पुलिस आरक्षक की ड्यूटी लगा रखी थी।तथा आश्रम में नगरवासीयों को आश्रम में आने जाने से रोका जा रहा था।मंगलादासी के अनुयायियों ने पुलिस उप महानिरिक्षक खण्डवा जिला पुलिस अधिक्षक एवं अनुविभागीय दण्डाधिकारी को भी आश्रम में दिनदहाडे मचाये जा रहे आतंक की सूचना मोबाईल के माध्यम से दी थी लेकिन उनकी कोई सुनवाई नही हुई।

इस संबध में जिम्मेदारों का कहना..

(1)
यह मैरे पति के नाम की भूमि हैं जो हमने रजिस्टर्ड पत्र के माध्यम से 15 वर्ष पूर्व खरीदी थी उनके देहान्त का बाद मुझे संत परंपरा अनुसार चादर ओढाकर मुझे ही इस आश्रम का मुखिया बना दिया गया था तभी से मैं इस आश्रम में रह रही हुं आज बाहर से आये गुंडे-बदमाश लोगों ने मुझे धक्का-मुक्की करके मुझे मैरे कक्ष से बलपूर्वक बाहर निकाला तथा मैरा मोबाईल भी छिन लिया एवं दो जेशीबी मशीनें आश्रम में लगाकर आश्रम को तोडा जा रहा हैं।यह मामाला खण्डवा न्यायालय में विचाराधीन हैं मैं आज पुलिस थाने भी गई थी लेकिन पुलिस ने मैरी कोई सुनवाई नही की।

साध्वी मंगलादासी
संचालिका
लालदास योगिराज आश्रम ओंकारेश्वर

(2)
मंगला दासी के आश्रम का प्रकरण खण्डवा जिला न्यायालय में विचाराधीन हैं अजयदास ने इस भूमि की जो रजिस्ट्री त्रिवेणी धाम राजस्थान वालों को जो रजिस्ट्री की है यह भी फर्जी है जबकी इस भूमि की वास्तविक मालिक मंगलादासी ही हैं पूर्व में भी हमें न्यायालय का स्टे मिला था इस प्रकरण की अगली सुनवाई आगामी 12 फरवरी को हैं।न्यायालय में इस प्रकरण के चलते बल पूर्वक तथा आंतक माचाकर कब्जा लेना न्यायोचित नही हैं।

सुभाष नागौरी
वरिष्ठ अधिवक्ता जिला खण्डवा

(3)
मैंने स्वर्गीय लालदास बाबा से दिक्षा ली थी आश्रम में लालदास बाबा की समाधी का निर्माण मैरे द्वारा किया था आश्रम के समस्त कागजात मैरे द्वारा ही बनाये गये हैं।

अजयदास
स्वर्गीय लालदास बाबा के शिष्य

(4)
ओंकारेश्वर आने वाले श्रद्धालुओं की सेवा के लिये ही पद्मविभूषित संत नारायण दास जी सेवा ट्रस्ट को मायराम मंगलादासी ने यह भूमि दान में महाराज श्री के समक्ष दान में दी थी।

सत्यनारायण गोयल
ट्रस्ट के सेवक