जूते ना पहनने पर स्कूल प्रबंधन ने 2 क्लास की छात्रा को किया बाहर, पिता ने सरकार से लगाई गुहार

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खंडवा। सुशील विधानी।

सरकार ने गरीब बच्चों के लिए शिक्षा का अधिकार कानून लागू किया पर प्राइवेट स्कूल इस कानून की धज्जियां उड़ाते नजर आ रहे हैं।  कभी एडमिशन के नाम पर तो कभी स्कूल यूनिफार्म और किताबों के नाम पर इन बच्चों को शिक्षा के अधिकार से दूर किया जा रहा हैं।  ऐसे ही एक मामला खंडवा में उस वक्त सामने आया जब एक पीड़ित पिता और उसकी बेटी को स्कूल शु के नाम पर बहार किये जाने और स्कूल प्रबंधन के दुर्व्यवहार का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा।  पीड़ित अब सरकार से गुहार लगा रहा हैं की ऐसे  प्राइवेट स्कूलों पर कार्यवाही कर शिक्षा के अधिकार की रक्षा करें। 

खंडवा के सेंट जॉन्स  प्राइवेट स्कूल ने दूसरी कक्षा में पढ़ने वाली मासूम बच्ची अलिस्बा को इस लिए स्कूल से बहार कर दिया क्यों की वह स्कूल में लेंस वाले शु पहन कर नहीं आई थी।  जब उसके पिता ने स्कूल प्रबंधन से बात करना चाही तो उसके साथ भी दुर्व्यवहार किया गया।  पीड़ित पिता ने इस पुरे घटनाक्रम का वीडियो बनाकर उसे सोशल मीडिया वायरल कर सरकार से ऐसे मनमानी करने वाले स्कूलों पर कार्यवाही की मांग की। पीड़ित पिता ने जिला शिक्षा अधिकारी को भी इस घटना की शिकायत की।  पीड़ित पिता आसिफ खान का कहना हैं कि उसकी बच्ची का एडमिशन आरटीई के तहत हुआ था पर स्कूल प्रबंधन उन्हें जबरन परेशान कर बच्ची को शिक्षा से दूर करना चाह रहा हैं। जब बच्ची स्कूल गई तो उसे लेंस वाले शु पहनने के नाम पर स्कूल से बहार कर दिया।  जब मैने प्रबंधन से बात करना चाही तो मेरे साथ भी दुर्व्यवहार किया गया।  

इधर स्कूल प्रबंधन ने उल्टा पीड़ित को ही कटघरे में खड़ा कर दिया।  स्कूल संचालक अमरीशसिंह सिकरवार ने कहा की छात्रा  अलिस्बा के पिता हर बार विवाद खड़ा करते हैं।  हमने किसी बच्चे को बहार नहीं निकला हमने तो पिता को बुलवा कर उसे स्कूल डेकोरम के तहत बच्चे को स्क़ूल भेजने को कहा था।  बच्ची के पिता ने ही जबरन विवाद कर मामले को तूल दिया। 

 वहीं शिक्षा विभाग के संदीप मीणा को जब इस मामले की शिकायत पीड़ित ने की तो उसकी शिकायत के बाद विभाग ने स्कूल प्रबंधन को नोटिस जारी कर स्कूल से इस घटना का जवाब तालाब किया।  विभाग का कहना है जवाब आने पर स्कूल के खिलाफ कार्यवाही की जायगी।  शिक्षा के अधिकार नियम के अंतर्गत किसी भी बच्चे को शिक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता।