मतदाताओं की खामोशी से दोनों दलों के प्रत्याशी बेचैन

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खंडवा। सुशील विधानी।

विधानसभा चुनाव को लेकर जिलेभर में सरगर्मियां बढ़ गई हैं। जगह जगह नुक्कड़ सभाएं चल रही हैं। वहीं प्रत्याशियों ने जनसंपर्क भी तेज कर दिया है। विधानसभा चुनाव में स्थानीय मुद्दे हावी है। रोजगार जिले में कुपोषण स्वास्थ्य सेवाएं सरकारी योजनाओं का लाभ हावी है, लेकिन इस बीच में चारों विधानसभा सीट पर मतदाता खामोशी अख्तियार किए हुए हैं। चाय पान की दुकानों पर चर्चाएं भी विधानसभा को लेकर चल रही हैं।

कांग्रेस और बीजेपी के प्रत्याशी जीत का दावा तो ठोक रहे हैं लेकिन आम जनता से जुड़ी समस्याओं के प्रति उनके आश्वासन को भी मतदाता प्रतिक्रिया देने में खुलकर नहीं बोल रहे हैं। चर्चाएं चल रही हैं मतदाताओं में यह है कि बीजेपी प्रत्याशी उतारा विकास के नाम पर वोट कांग्रेस प्रत्याशियों द्वारा रोजगार और मूलभूत समस्याएं देने का वादा किया जा रहा है, लेकिन मतदाता रोजगार पर ज्यादा फोकस करता हुआ दिखाई दे रहा है, क्योंकि जिले का ग्रोथ सेंटर कोई उपलब्धि जिलेवासियों को नहीं दे सका। मतदाताओं का यह भी कहना है कि जो प्रत्याशी खुद बेरोजगार है। वहां हमें कैसे रोजगार देंगे क्योंकि कई प्रत्याशी तो ऐसे ही जिनके पास अपना खुद का व्यवसाय बताने के नाम पर भी कुछ नहीं है?अगर बात करें अन्य मुद्दों की तो कुपोषण की वजह से जिले की जिस तरह प्रदेश स्तर पर किरकिरी होती है वह शायद और कहीं नहीं होती। विपक्षी दल इस मुद्दे को भुनाने को आतुर है लेकिन वे खुद कंफ्यूज है ? कि चुनाव में किस किन मुद्दों पर जनता के बीच जाए।

स्वास्थ्य की बात करें तो जिले में मेडिकल कॉलेज खुलने से आने वाले दिनों में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर होने की उम्मीद की जा रही है। खंडवा नगर निगम एवं तहसील स्थित नगर पंचायतों की कार्यशैली मतदाताओं को कितना संतुष्ट कर पाई है। यह चुनाव बाद ही पता चल पाएगा। फि लहाल दोनों ही दलों के प्रत्याशी के साथ निर्दलीय भी विधायक बनने के ख्वाब पाले हुए हैं।

स्टार प्रचारकों के भरोसे प्रत्याशी

दोनों ही दलों के प्रत्याशी स्टार प्रचारकों के भरोसे जीत का दावा ठोक रहे हैं। प्रचारकों को देखने व सुनने के लिए उमड़ रही भीड़ से प्रत्याशी मुगालते में हैं कि भीड़ यानि ये मतदाता उसके समर्थक हैं। लेकिन ऐसा नहीं है। मतदाता चुपचाप हैं।  वहीं कुछ खबर नशीनों ने  स्टार प्रचारकों को भी  सेल्फ ी के लिए नहीं छोड़ा।  इधर सूत्रों से पता चला है कि कई प्रत्याशियों की कंजूसी के कारण कार्यकर्ता नाराज हैं। ऐसे में क्या प्रत्याशी विधानसभा चुनाव में सफ लता प्राप्त कर लेंगे क्योंकि कार्यकर्ता ही मैदानी सफ लता प्राप्त कराता है।