ओंकारेश्वर में साल में एक बार बाहर आते है श्री गणेश

ओंकारेश्वर। सुशील विधानि।

लोहड़ी के साथ ही आज संकष्टी चतुर्थी व्रत भी है। आम बोलचाल में लोग इसे संकट चौथ भी कहते हैं। इस दिन भक्त भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखते हैं और उनकी पूजा अर्चना करते हैं। शाम को चांद निकलने के बाद व्रत खोला जाता है। आज ही के दिन भगवान गणेश को शकरकंद का भोग लगाना व शकरकंद सेवन करने की भी परंपरा है। इस व्रत को महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और मध्यप्रदेश के ज्यादातर इलाकों में किया जाता है।

          ओंकारेश्वर माध्यानकाल पुजारी पंडित बाला सुधाकर राव शास्त्री के निवास पर स्थित वर्षो पुरानी गणेश जी की प्रतिमा को साल की बडी संकष्टी गणेश चतुर्थी पर पट खोले गये उसके बाद वरिष्ठ पंडित सुरेशचन्द्र त्रिवेदी के आचार्यतत्व में महा अभिषेक किया जाता हैं। यह क्रम पिढि़यों से पुजारी परिवार करता चला आ रहा हैं। शास्त्री परिवार के वरिष्ठ आनन्द शास्त्री ने जानकारी देते हुए बताया की यह परंपरा वर्षों से हमारे पूर्वजों द्वारा चली आ रही है जीसका हम निर्वाह कर रहे है वर्ष भर में श्रद्धालुओं के दर्शन के लिये एक बार भगवान् श्री गणेश जी के पट खोले जाकर 11 सौ गणेश अथर्वशिर्ष पाठ से अभिषेक पंडित सुरेशचन्द्र त्रिवेदी के आचार्यतत्व में किया जाता हैं पश्चात भोजन प्रसादी भण्डारे का कार्यक्रम विगत कई वर्षो से होता चला आ रहा हैं।

चन्द्रोदय के बाद महिलाओं ने खोला व्रत

ओंकारेश्वर में गणेशचतुर्थी तिथी पर देर रात्री नगर की व्रती महिलाओं द्वारा भगवान गणेश की पूजन-अर्चन करके तिल, गुड़, शकरकंद चंदन कुशा पुष्प का अर्घ दिया और फल आदि का भोग लगाकर व्रत खोला।