खरगोन : क्राइसिस मैनेजमेंट की बैठक संपन्न, शादी और मृत्युभोज पूरी तरह होगा प्रतिबंध

क्राइसिस मैनेजमेंट की बैठक में जिले में अधिक सख्ती बरतने का निर्णय बैठक में लिया गया है, साथ ही शादी और मृत्युभोज पूरी तरह प्रतिबंध लगाने निर्णय भी लिया गया है।

खरगोन, बाबूलाल सारंग। खरगोन (Khargone) में कोरोना संक्रमण (Corona infection) की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रदेश के पर्यावरण और जिले के कोरोना प्रभारी मंत्री हरदीप सिंह डंग (Minister Hardeep Singh Dang) ने बुधवार को क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप (Crisis Management Group) की बैठक की, जिसमें जिले में अधिक सख्ती बरतने का निर्णय बैठक में लिया गया है, साथ ही शादी और मृत्युभोज पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का निर्णय भी लिया गया है।

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मंत्री ने अध्यक्षता करते हुए कहा कि जिले में अब शादी और मृत्युभोज के कार्यक्रमों को पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा, साथ ही शवयात्रा में 5 लोगों से अधिक व्यक्तियों को अनुमति नहीं दी जाए। इसके अलावा मंत्री डंग ने निर्देश देते हुए कहा कि इससे पूर्व शादियों के लिए जो भी अनुमतियां दी गई है, उसे भी निरस्त करें। उन्होंने सभी विधायकों और संकट प्रबंधन समूह के सदस्यों के विचारों व सुझावों पर गौर करते हुए निर्देश दिए कि अस्पताल में 2 अधिकारियों की ड्यूटी लगाई जाए, जो जनप्रतिनिधियों, समूह और आम नागरिकों को अस्पताल की व्यवस्थाओं से संबंधित पूरी जानकारी दे सके। मंत्री डंग ने विधायकों द्वारा दी गई राशि के संबंध में जो भी सामग्री खरीदी जानी है उसके लिए ठेकेदार से बात कर समय पर उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। सिविल सर्जन डॉ. दिव्येश वर्मा से ऑक्सीजन प्लांट के बारे में जानकारी ली और बताया गया कि प्लांट के लिए बेसमेंट तैयार हो गया है आगामी सात दिनों में प्लांट की मशीन लगाई जाएगी। ठेकेदार से इस संबंध में निरंतर समन्वय किया जा रहा है। संकट प्रबंधन समूह के सदस्यों ने रेमडेसिविर इंजेक्शन (Remdesivir Injection) को लेकर भी जानकारी ली। इस बात को लेकर मंत्री डंग ने कहा कि जिन मरीजों को रेमडेसिवीर इंजेक्शन लगाए जा रहे है उनकी सूची भी प्रतिदिन जारी की जाए।

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मंत्री डंग ने जिले में कोरोना कर्फ्यू के पालन को लेकर भी जानकारी ली। जिला पंचायत अतिरिक्त सीईओ पुरुषोत्तम पाटीदार ने जानकारी देते हुए बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना कर्फ्यू का सख्ती से पालन किया जा रहा है। कई ऐसे गांव सामने आए है, जो स्वयं की सहमति गांव बंद करते हुए बाहरी लोगों को आने की अनुमति नहीं दे रहे है। मंत्री डंग ने विधायकों द्वारा कोरोना कर्फ्यू के पालन को लेकर किए गए प्रश्न पर कहा कि कोरोना कर्फ्यू का पालन कराना हमारी भी जिम्मेदारी है। सभी विधायक अपनी-अपनी विधानसभाओं में पालन कराने को लेकर आवश्यक कदम उठाए। साथ ही पुलिस अधीक्षक शैलेंद्र सिंह चौहान को निर्देश दिए कि ये सप्ताह ज्यादा सख्ती बरते और कोरोना कर्फ्यू का पालन कराए। उन्होंने सभी एसडीएम तहसीलदार और टीआई को भी निर्देशित किया है कि शहरी क्षेत्रों में कोरोना कर्फ्यू का पालन कराना जरूरी हो गया है।

अस्पताल के सभी वार्ड के अलग-अलग प्रभारी बनाए
बैठक के दौरान सांसद गजेंद्र पटेल ने कहा की गत दिवस महेश्वर व बड़वाह के सीसी सेंटर देखे और होम आईसोलेशन (Home Isolation) में रह रहे मरीजों से भी वीडियों कॉल के माध्यम से स्वास्थ के बारे में जानकारी ली जा रही है। उन्होंने सीएचएमओ ड़ॉ. डीएस चौहान और सिविल सर्जन डॉ. दिव्येश वर्मा से कहा कि अस्पताल में व्यापक व्यवस्था कराना आपका काम है, उसे व्यवस्थित रूप से कराया जाए। अस्पताल में सभी वार्ड के लिए अलग-अलग प्रभारी बनाए जाए, जिसमें प्रशासनिक अधिकारियों को शामिल किया जाए, जो अस्पताल और वार्डों की जानकारी सभी को दे सके। साथ ही फ्लोमिटर कि मांग है उसका प्रबंध किया जाए।

विधायकों और समूह के सदस्यों से चर्चा व सुझाव
बैठक के दौरान मंत्री डंग ने संकट प्रबंधन समूह के सभी सदस्यों और विधायकों के विचारों और सुझावों को सुना। कसरावद विधायक सचिन यादव ने कहा कि अस्पताल में मरीज के साथ 4-4 अटेंडर है। वे खुद भी संक्रमित हो रहे है और घर जाकर अन्य लोगों को भी संक्रमित कर सकते है। साथ ही होम आईसोलेशन में रह रहे मरीजों को प्रॉपर तरीके से पालन कराया जाए। विधायक यादव ने कहा कि जिला अस्पताल में ही सिटी स्केन और अन्य जांच की सुविधा करवाई जाए वही विधायक रवि जोशी ने कहा कि सरकार भी टीकाकरण पर ही जोर दे रही है इसलिए जिले में टीकाकरण पर जोर दे। रेमडेसिविर का बुलेटिन जारी किया जाए। साथ ही गोगावां चऊन में बने सीसी सेंटर में पल्स ऑक्सीमीटर (pulse oximeter) उपलब्ध है या नहीं इसकी जानकारी दे नही तो विधायक निधि की राशि से इन्हें उपलब्ध कराए जाएं और बची हुई राशि से जिला अस्पताल में भी उपलब्ध कराए। विधायक जोशी ने कहा कि 50-60 और 70-90 ऑक्सीजन सेच्युरेशन वाले मरीजों को अलग-अलग वार्ड में रखा जाए, जिससे इन मरीजों को देख अन्य मरीज घबराए नहीं।

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